धार (कुक्षी) माणक लाल जैन
4 जून को कुक्षी मे प्रवेश 
कुक्षी पुण्य सम्राट राष्ट्रसंत युगप्रभावकाचार्य श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्य एवं द्वय आचार्य श्री के आज्ञानुवर्ती मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजय जी म सा व मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजय जी म सा अनेक संघो मे विचरण करते हुवे सिमन्धार स्वामी जिनालय के तीर्थ घोषणा के कार्यक्रम मे निश्रा प्रदान हेतु 4 जून को कुक्षी में प्रवेश करेगे ।उस दिन विशेष संयोग है कि मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजय जी म सा का 11 वॉ संयम दिवस भी है । पिटोल प्रतिष्ठा व मालवा प्रवेश पर कुक्षी श्रीसंघ से पधारे महानुभावों ने श्री सिमन्धार स्वामी जिनालय कुक्षी की शताब्दी तीर्थ घोषणा हेतु निश्रा प्रदान करने भावपूर्ण विनती की जिसे गच्छाधिपति श्रीमद् विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म सा की आज्ञा से सहज स्वीकृती प्रदान की। अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् के राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि मुनि भगवंतो की निश्रा मे शताब्दी महोत्सव होगा जब जिनालय स्थावर तीर्थ हो जायेगा। पूर्व मे 4 जिनालय तीर्थ है 4 जून के बाद नगर मे 5 वॉ जिनालय तीर्थ बन जायेगा।
कुक्षी नगर का इतिहास
नर्मदा नदी घाटी के पश्चिम और विंध्य के दक्षिण में स्थित कुक्षी, धार जिले में मध्यप्रदेश निमाड़ क्षेत्र का एक हिस्सा है। श्री सौधर्म बृहद तपागच्छीय जैन श्रीसंघ के पाठ परम्परागत आचार्य श्रीमद् विजय राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराजा से लेकर राष्ट्रसंत श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वर जी म सा एवं उनके पट्टधर व शिष्यों की आमना मे रहने वाला कुक्षी नगर जिसमे प्रात: स्मरणीय परम पूज्य दादा राजेन्द्र सूरि जी गुरुदेव ने संवत1927 मे चातुर्मास किया जो उनकी तपस्या और धार्मिक गतिविधियों का केंद्र रहा। उन्होंने निर्जन मांगी तुंगी स्थान में तपस्या करके और नमो अरिहंताणं पद का जाप करके अपने धर्म के प्रति अपनी भक्ति दिखाई।











