झाबुआ माणक लाल जैन
सफलता की कहानी
किशनपुरी के सचिन चौहान बने सफल युवा उद्यमी
“टेस्ट ऑफ झाबुआ हॉटल एवं रेस्टोरेंट” के माध्यम से अन्य को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे है सचिन
झाबुआ, 15 जून 2025 जिले के ग्राम किशनपुरी का एक शिक्षित युवा अपने आत्मबल और शासन की योजना की मदद से अन्य युवाओं के लिये संघर्ष की मिसाल बन गया है, उसका नाम है श्री सचिन चौहान। झाबुआ जिले के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र से सचिन चौहान पिता भारतसिंह चौहान शिक्षित बेरोजगार थे जिन्होनें जिले में अपनी स्वयं की इकाई स्थापित कर आज न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि जनजातीय युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन चुके हैं।
सचिन चौहान झाबुआ जिले के एक छोटे से ग्राम किशनपुरी के रहने वाले है। अपने स्वयं की इच्छा से अपनी इकाई स्थापित कर अपने पैरों पर खड़े होकर भविष्य बनाने का निर्णय लेते हुए झाबुआ में हॉटल एवं रेस्टोरेंट आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अपनी इकाई स्थापित की।
इकाई स्थापित करने हेतु धन की आवश्यकता होती है जिसकी पूर्ति हेतु उन्होंने शासन की स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से ऋण लेकर अपनी इकाई स्थापना का मन बनाया। इस हेतु वे जिले में स्थित म.प्र.आदिवासी वित्त एवं विकास निगम झाबुआ के कार्यालय में गये। जहाँ उन्हें वहाँ उपस्थित अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा सम्पूर्ण मार्गदर्शन व सहयोग प्रदान किया गया। सचिन चौहान को हॉटल एवं रेस्टोरेंट इकाई हेतु म.प्र. आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजनान्तर्गत भारतीय स्टेट बैंक राजवाड़ा झाबुआ से चर्चा कर 15.00 लाख रू. का ऋण प्रकरण बनाकर बैंक को प्रेषित किया गया।
बैंक से ऋण मिलने के पश्चात उन्होंने अपनी इकाई “टेस्ट ऑफ झाबुआ हॉटल एवं रेस्टोरेंट” के नाम से प्रारंभ कर झाबुआ के लोगों को सेवा प्रदान कर रहे है।
स्वरोजगार के माध्यम से सचिन चौहान अपनी इकाई से प्रतिमाह 45,000 से 50,000 रुपये की आमदनी कर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे है साथ ही अपनी इकाई पर अन्य को रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। अन्य बेरोजगार युवाओं हेतु स्वयं का एक उदाहरण पेश कर रहे है। सचिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को प्रदेश में चल रही स्वरोजगार की योजनाओं के लिए और म.प्र आदिवासी वित्त एवं विकास निगम को मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद देते हैं।
म.प्र आदिवासी वित्त एवं विकास निगम ने उन्हे भविष्य में सम्पूर्ण सहयोग व मार्गदर्शन प्रदान करने का अश्वासन दिया है साथ ही विभाग उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।
भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना:-
जिले के शिक्षित अनुसूचित जनजाति वर्ग के ऐसे बेरोजगार युवक एवं युवतियां के स्वरोजगार के लिए आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना चलाई जा रही है जिसमें आवेदक को सेवा अथवा व्यवसाय के लिए राशि 1.00 लाख से 25.00 लाख रुपये तक एवं निर्माण इकाई के लिए राशि 1.00 लाख से 50.00 लाख रूपए तक का ऋण विभिन्न बैंको से उपलब्ध कराया जाता है इसके लिए आवेदक की आयु 18 वर्ष से 45 वर्ष तक होना आवश्यक है तथा शैक्षणिक योग्यता न्यूनतम 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण हो।











