जिंद-सोनीपत रूट पर भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की बड़ी सफलता
करीब 6 हजार किलोमीटर का सफर पूरा, 36 टन से अधिक CO₂ उत्सर्जन में कमी
नई दिल्ली, 25 अगस्त 2026। भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित यात्री ट्रेन ने जिंद-सोनीपत रूट पर सफलतापूर्वक संचालन करते हुए करीब 6 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर ली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को इस ट्रेन का उद्घाटन किया था। इसके साथ ही भारत ने स्वच्छ और हाइड्रोजन आधारित रेल परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
हाइड्रोजन ट्रेन में 1,200 किलोवाट क्षमता वाले दो हाइड्रोजन-इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम लगाए गए हैं। ट्रेन में मौजूद फ्यूल सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की मदद से बिजली पैदा करते हैं, जिसका इस्तेमाल ट्रेन को चलाने में किया जाता है। इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से जलवाष्प और गर्मी उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं।
36 टन से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन में कमी
हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन से पर्यावरण को भी बड़ा लाभ हुआ है। एक पारंपरिक डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) ट्रेन से प्रति किलोमीटर करीब 6.074 किलोग्राम CO₂ समकक्ष उत्सर्जन होता है। ऐसे में 6 हजार किलोमीटर की यात्रा के दौरान हाइड्रोजन ट्रेन के इस्तेमाल से करीब 36,444 किलोग्राम यानी 36 टन से अधिक CO₂ समकक्ष उत्सर्जन से बचाव हुआ है।
यात्रियों की जेब पर भी नहीं पड़ेगा अतिरिक्त बोझ
इस ट्रेन का किराया सामान्य DEMU सेवाओं के बराबर रखा गया है। यात्रियों को रूट के अनुसार 10 से 25 रुपये तक किराया देना होगा। 10 कोच वाली यह हाइड्रोजन ट्रेन जिंद में स्थापित स्वदेशी हाइड्रोजन भंडारण और रिफ्यूलिंग सुविधा की मदद से संचालित हो रही है।
हाइड्रोजन ट्रेन का सफल संचालन भारत के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के उद्देश्यों को भी मजबूती देता है। जिंद-सोनीपत रूट पर इसका संचालन स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर रेल परिवहन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह तकनीक भविष्य में भारतीय रेलवे को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की संभावनाओं को भी मजबूत करती है।












