झाबुआ माणक लाल जैन
*ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित एवं नियम विरुद्ध प्रयोग पर नियंत्रण हेतु प्रतिबंधात्मक आदेश जारी*
*बिना अनुमति लाउडस्पीकर, डीजे, बैंड एवं प्रेशर हॉर्न का उपयोग प्रतिबंधित*
*रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध*
झाबुआ, 04 सितम्बर 2026 जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी डॉ. योगेश तुकाराम भरसट द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 (1) एवं (2) के तहत झाबुआ जिले की सम्पूर्ण राजस्व सीमा में ध्वनि विस्तारक यंत्रों के अनियंत्रित एवं नियम विरुद्ध उपयोग पर प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है। आदेश 04 सितम्बर से 04 नवम्बर 2026 तक प्रभावशील रहेगा।
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत जिला दण्डाधिकारी को जिले की सीमा में नियमों के क्रियान्वयन के लिए प्राधिकारी बनाया गया है। इसी परिप्रेक्ष्य में आगामी त्यौहारों एवं विभिन्न आयोजनों को दृष्टिगत रखते हुए लाउडस्पीकर, डीजे, बैंड, प्रेशर हॉर्न एवं अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।
आदेश के अनुसार जिले में समस्त उत्सव एवं आयोजनों के दौरान लाउडस्पीकर, डीजे, बैंड, प्रेशर हॉर्न तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग विहित प्राधिकारी की अनुमति के बिना प्रतिबंधित रहेगा। ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के निर्धारित शेड्यूल के अनुसार मानक सीमा से अधिक ध्वनि का प्रसारण भी प्रतिबंधित रहेगा।
रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर, डीजे, बैंड, प्रेशर हॉर्न तथा अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का उपयोग पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहेगा।
ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए दिन एवं रात के समय अधिकतम ध्वनि स्तर निर्धारित किया गया है। औद्योगिक क्षेत्र में प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक अधिकतम 75 डेसीबल तथा रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक 70 डेसीबल ध्वनि स्तर निर्धारित है।
इसी प्रकार वाणिज्यिक क्षेत्र में दिन के समय 65 डेसीबल एवं रात में 55 डेसीबल, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 डेसीबल एवं रात में 45 डेसीबल तथा शांत क्षेत्र में दिन के समय 50 डेसीबल एवं रात में अधिकतम 40 डेसीबल ध्वनि स्तर निर्धारित है।
भारत सरकार द्वारा पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए सार्वजनिक स्थलों पर विभिन्न स्रोतों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने के लिए 14 फरवरी 2000 को ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 अधिनियमित किए गए थे। उक्त नियम मध्यप्रदेश में भी प्रभावशील हैं।
सर्वोच्च न्यायालय एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा भी ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने तथा प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देशों में लाउडस्पीकर, हॉर्न एवं अन्य माध्यमों से उत्पन्न होने वाले अनावश्यक शोर को नियंत्रित करने के प्रावधान शामिल हैं।
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा गत वर्षों में शहर के शांत, आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में परिवेशीय ध्वनि स्तर का मापन किया गया। इसमें विभिन्न क्षेत्रों में ध्वनि का स्तर निर्धारित मानक सीमा से अधिक पाया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा आगामी त्यौहारों के दौरान लाउडस्पीकर, डीजे एवं अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों के उपयोग से ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की संभावना भी व्यक्त की गई है। मध्यप्रदेश शासन, गृह विभाग द्वारा भी ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।
चूंकि यह आदेश आम जनता के महत्व का एवं सर्वसाधारण को संबोधित है तथा इसकी व्यक्तिशः सूचना दिया जाना संभव नहीं है, इसलिए इसे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 (2) के तहत एकपक्षीय रूप से पारित किया गया है।
यह आदेश 04 सितम्बर से 04 नवम्बर 2026 तक प्रभावशील रहेगा। प्रभावशील अवधि में आदेश का उल्लंघन भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 223 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।












