June 13, 2026 2:50 am

भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ ट्रस्ट

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नवसम्वतसरोत्सव का यज्ञ व आध्यात्मिक सम्मलेन से हुआ शुभारम्भ  

नवसम्वतसरोत्सव का यज्ञ व आध्यात्मिक सम्मलेन से हुआ शुभारम्भ

 

*अष्टांगयोग और आत्मानुकूल व्यवहार से होगा जीवन सफल -स्वामी आर्यवेश*

 

*पंचमहायज्ञ हमारी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं-आचार्य रणवीर आर्य*

 

*वेदानुकूल जीवन जीने से मुक्ति का मार्ग होगा प्रशस्त-कृष्ण मुनि*

 

गाजियाबाद,शनिवाऱ,18 मार्च 2026,जिला आर्य सभा,आर्य केन्द्रीय सभा एवं सन्यास आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में 152 वें दो दिवसीय आर्य समाज स्थापना दिवस व नवसम्वत्सरोत्सव के उपलक्ष्य में शम्भु दयाल दयानन्द वैदिक सन्यास आश्रम दयानन्द नगर में भव्य आध्यात्मिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञब्रह्मा आचार्य रणवीर आर्य ने यज्ञ कर किया मुख्य यज्ञमान श्रीमती भावना गुप्ता, राजीव गुप्ता,मृदुला अग्रवाल,विनोद प्रकाश अग्रवाल,डा आर के आर्य, प्रवीण आर्य आदि रहे।उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि ऋषि दयानन्द ने जो पंचमहायज्ञ दिए हैं वह हमारी आध्यात्मिक चेतना को जागृत करते हैं।यह हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं।इस यज्ञ को जिसने आत्मसात कर लिया यह उसका आत्मिक बल बढ़ा देगा।

 

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्य वेश ने ओ३म् ध्वजारोहण कर आध्यात्मिक सम्मेलन को शुभारम्भ किया और अपने उद्बोधन में कहा कि अध्यात्म में प्रवेश के लिए महर्षि पतंजलि के अष्टांगयोग यम,नियमों का पालन करते हुए और आत्मानुकूल व्यवहार करते हुए परमात्मा की और झुकेंगे तो जीवन सफल होगा और मोक्ष मिलेगा।इसके साथ ही हमें संसारस्थ तीन शक्तिओं ईश्वर, जीव और प्रकृति का ठीक ठीक ज्ञान भी होना चाहिए।उन्होंने आगे कहा कि रात्रि में सोते समय तीन मिनट में अपनी दैनिक दिनचर्या की समालोचना का लो,इसे भी अध्यात्म कहते हैं।कोई भूल हुई है तो उसका प्रायश्चित्त करो ताकि वह दोबारा न हो,गायत्री मंत्र का जप करो जिसमें प्रभु से बुद्धि की प्रार्थना है।परमात्मा बुद्धि से हमारे कार्य ठीक करता है।

 

सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक वेदपाल आर्य के द्वारा ऋषि दयानन्द एवं आर्य समाज महिमा गुणगान को भजनोपदेश के माध्यम से सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।

 

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में आचार्य कृष्ण मुनि ने कहा कि स्वामी दयानन्द ने आर्य समाज के दस नियमों में एक नियम में बताया है कि सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उनका आदि मूल परमेश्वर है।ईश्वर जीव और प्रकृति को ठीक ठीक समझने से अध्यात्मवाद पूर्ण हो जाता है।उस परमेश्वर कि वाणी वेद है।वेदानुकूल चलने से जीवन सफल होगा,मुक्ति का मार्ग मिलेगा।मानव जन्म पूर्व संचित शुभ कर्मों के फलस्वरुप मिला है इसमें संध्या स्वाध्याय जरुरी है।

 

कार्यक्रम का कुशल संचालन यशस्वी मंत्री आर्य नरेन्द्र पांचाल ने किया।उन्होंने आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

 

आर्य नेता श्रद्धानंद शर्मा,सेवा राम त्यागी, डा प्रमोद सक्सेना, स्वामी सूर्यवेश,आश्रमचार्य जितेंद्र आर्य, सुभाष शर्मा,वेद व्यास,चौधरी मंगल सिंह,देवेन्द्र मेहता,सत्यकेतु एडवोकेट, डा प्रतिभा सिंघल,आशा आर्या आदि उपस्थित थे।

 

शांतिपाठ,ऋषिलंगर के साथ समारोह संपन्न हुआ।

 

 

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