June 13, 2026 5:49 am

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गरीब आदिवासियों पर चला बुलडोजर! अब विधायक कमलेश्वर डोडियार ने खोला मोर्चा, राजस्व विभाग पर उठे गंभीर सवाल मध्यप्रदेश (धार)

‌ गरीब आदिवासियों पर चला बुलडोजर! अब विधायक कमलेश्वर डोडियार ने खोला मोर्चा, राजस्व विभाग पर उठे गंभीर सवाल

माणक लाल जैन धार

मध्यप्रदेश (धार)

50-60 साल से काबिज आदिवासी परिवारों को बेदखल करने का मामला गरमाया, राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा पत्र

धार-आदिवासी अधिकारों और जमीन के सवाल पर एक बार फिर सियासत और प्रशासन आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं। सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने खंडवा जिले के पुनासा राजस्व अनुभाग में गरीब आदिवासी परिवारों के खिलाफ की गई बेदखली कार्रवाई को लेकर बड़ा मोर्चा खोल दिया है। विधायक ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सीधे राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई निरस्त करने और पीड़ित परिवारों को मालिकाना हक देने की मांग की है।
मामला खंडवा जिले के पुनासा तहसील अंतर्गत ग्राम बिल्लौर बुजुर्ग का है, जहां खसरा नंबर 130 की करीब 3.43 हेक्टेयर भूमि पर अनुसूचित जनजाति के परिवार पिछले 50 से 60 वर्षों से खेती कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। आरोप है कि 12 मई 2026 को बिना समुचित वैधानिक प्रक्रिया अपनाए प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई करते हुए गरीब आदिवासी परिवारों को जमीन से बेदखल कर दिया।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने अपने पत्र में साफ शब्दों में कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं बल्कि आदिवासी समाज के संवैधानिक और मानवाधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को दरकिनार कर प्रशासनिक कार्रवाई की गई, जिससे गरीब परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959, वन अधिकार अधिनियम 2006 और राज्य सरकार की पट्टा वितरण नीतियों के तहत वर्षों से काबिज आदिवासी परिवारों को संरक्षण और मालिकाना हक देने का प्रावधान है। इसके बावजूद यदि ऐसे परिवारों पर बुलडोजर चलाया जाता है तो यह न केवल नियमों की अनदेखी है बल्कि आदिवासी समुदाय की भावनाओं को भी आहत करने वाला कदम है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद आदिवासी समाज में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। विधायक ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि यदि ऐसे मामलों में न्याय नहीं हुआ तो हालात गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने बेदखली कार्रवाई तत्काल प्रभाव से निरस्त करने, पीड़ित परिवारों को मालिकाना अधिकार देने और दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

अब इस पूरे मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर दशकों से काबिज परिवारों पर इतनी बड़ी कार्रवाई किस आधार पर की गई और क्या प्रशासन ने नियमों का पालन किया? आने वाले दिनों में इस मामले पर शासन-प्रशासन का रुख बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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