गाजियाबाद,बुधवार 10 जून 2026,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में आर्य समाज के छठे नियम पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 789 वाँ वेबीनार था।
वैदिक प्रवक्ता सुधीर बंसल ने बताया कि महर्षि दयानन्द ने 1875 में प्रथम आर्य समाज की स्थापना के समय 28 नियम बनाए थे,जिन्हें 1877 में लाहौर आर्य समाज की स्थापना के अवसर पर संक्षिप्त कर 10 नियमों के रूप में प्रस्तुत किया गया।उन्होंने आर्य समाज के छठवें नियम—“संसार का उपकार करना इस आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है,अर्थात् शारीरिक,आत्मिक एवं सामाजिक उन्नति करना”—की व्याख्या करते हुए कहा कि समाज सेवा का आधार स्वस्थ शरीर, आत्मिक उन्नति और सदाचार है। उन्होंने शुद्ध आहार-विहार, निष्काम कर्म,ईश्वर-प्रणिधान तथा समाज कल्याण के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
सभा की अध्यक्षता प्रवीण आर्य ने की। उन्होंने सदाचरण और ईश्वरीय गुणों को जीवन में अपनाने पर बल दिया,कार्यक्रम का कुशल संचालन परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने किया।











