June 13, 2026 12:03 am

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साकेत बिल्डिंग हादसे के 12 दिन बाद भी मलबा नहीं हटा पाई भाजपा सरकार, क्या छिपाया जा रहा?

भोज कुमार  दिल्ली
आम आदमी पार्टी ने साकेत स्थित सैदुलाजाब में गिरी बिल्डिंग का मलबा अभी तक नहीं हटने पर भाजपा सरकार को आड़े हाथ लिया है। ‘‘आप’’ के एमसीडी में सह प्रभारी प्रवीण कुमार ने कहा कि हादसे के 12 दिन बाद भी भाजपा सरकार मलबा नहीं हटा पाई है। आखिर क्या छिपाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार मौतों का असल आंकड़ा छिपाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा चला रही है। उन्होंने भाजपा सरकार से पूछा कि आखिर रेस्क्यू ऑपरेशन कब खत्म होगा? अगर दिल्ली में कहीं इससे बड़ी त्रासदी हो गई तो उससे निपटने के लिए सरकार की क्या तैयारी है? उन्होंने मांग की कि सैदुलाजाब मामले की एसआईटी से जांच कराई जाए ताकि मौतों का सही आंकड़ा पता चल सके और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके।

बुधवार को “आप” मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर एमसीडी सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने साकेत स्थित सैदुलाजाब में गिरी बिल्डिंग की वीडियो दिखाते हुए कहा कि 30 मई को 500 गज की इमारत भरभरा कर गिर गई थी। हादसे के 12 दिन बीतने के बावजूद वहां रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी चल रहा है। मलबा लगातार हटाया जा रहा है। सरकार बताने को तैयार नहीं है कि आखिर यह रेस्क्यू ऑपरेशन और कितने दिनों तक चलाया जाएगा? भाजपा सरकार इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है ताकि जनता इस हादसे को भूल जाएं। इस पर चर्चा न हो और भाजपा सरकार में लगातार ऐसे हादसे हो रहे हैं।

प्रवीण कुमार ने कहा कि बिल्डिंग गिरने के दौरान “आप” का एक पांच सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची थी। हमने पूरे हालात का आकलन किया और आसपास के लोगों से बात की। स्थानीय लोगों के अनुसार, मलबे में अभी भी कई लोगों के दबे होने की आशंका थी। लेकिन सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन को धीमा कर दिया। आज 12 दिन हो चुके हैं, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी चल ही रहा है और पूरा मलबा नहीं हटाया जा सका है। भाजपा की दिल्ली और केंद्र सरकार बताए अगर 400-500 गज की बिल्डिंग के लिए 12 दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चल सकता है, तो दिल्ली में कोई बड़ी त्रासदी होने पर रेस्क्यू ऑपरेशन कितने दिनों तक चलेगा? भाजपा ने सिस्टम का मजाक बना रखा है। ये लोग हर चीज को अपने हिसाब से मैनिपुलेट करते हैं।

प्रवीण कुमार ने बताया कि 9 जून को जब आम आदमी पार्टी की तीन सदस्यीय टीम वहां पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन धीमा होता पाया। लोगों ने बताया कि मरने वालों का असली आंकड़ा छिपाया जा रहा है। ऐसे में सरकार स्पष्ट करे कि रेस्क्यू ऑपरेशन कब खत्म होगा? अगर दिल्ली में ऐसी कोई बड़ी त्रासदी हो गई, तो सरकार की क्या तैयारी है? जिस तरह स्थानीय लोग बता रहे हैं कि मृतकों की संख्या कहीं ज्यादा है, उसे देखते हुए इस मामले में एसआईटी से जांच होनी चाहिए। इस बात का दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए कि आखिर असल में कितने लोगों की मौत हुई है और कितने लोग घायल हुए हैं और इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं। ताकि उन पर कार्रवाई हो सके।

इस दौरान एमसीडी सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि 12 दिन बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन का चलना प्रशासन की आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। यह पूरी नाकामी को बयां करता है। अगर दिल्ली में कोई इससे बड़ा हादसा हो जाता है, तो भाजपा को यह बताना चाहिए कि उनके पास क्या-क्या प्रबंधन है? आज दिल्ली की जनता भयभीत है क्योंकि राजधानी में हादसे बढ़ते जा रहे हैं। कहीं इमारतें गिर रही हैं, तो कहीं आग लग रही है। जब भी दिल्ली में कोई हादसा होता है, तो इतनी धीमी गति से काम किया जाता है जैसे कोई नुकसान ही न हुआ हो। आम आदमी पार्टी भाजपा से मांग करती है कि वे अपनी आपदा प्रबंधन व्यवस्था को सार्वजनिक करें। हादसे में मारे गए लोगों के असल आंकड़े छिपाए जा रहे हैं। हमारी मांग है कि दिल्ली की जनता को सही आंकड़े बताए जाएं और इस मामले की जल्द से जल्द जांच की जाए ताकि खौफ में जी रहे लोगों को कुछ सुकून मिल सके।

उधर, “आप” के महरौली पुर्व जिलाध्यक्ष नरेश त्यागी ने बताया कि मंगलवार को आम आदमी पार्टी मौके पर गई थी। वहां की वास्तविक स्थिति यह है कि लगभग 40 फीसद मलबा अभी भी जस का तस पड़ा हुआ है। मलबे के नीचे एक बेसमेंट भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेस्क्यू टीम दिन में न के बराबर काम करती है। इनका मकसद किसी भी तरह से मौत के असल आंकड़ों को छिपाना है। स्थानीय लोगों ने बताया है कि मलबे से कई शव निकाले गए हैं, लेकिन प्रशासन ने अभी तक इस पर कोई प्रेस वार्ता नहीं की है। वे मौत के आंकड़ों को सामने नहीं आने देना चाहते। हमारी मांग है कि तुरंत एक एसआईटी का गठन कर इस पर विभागीय जांच बैठाई जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि इस हादसे में अब तक कितनी मौतें हुई हैं और बचे हुए मलबे को उठाने में कितना समय लगेगा, क्योंकि वहां हालात अभी भी बेहद खराब हैं।

इस बीच निगम पार्षद अरुण नावरिया ने कहा कि भाजपा की चार इंजन वाली सरकार में देश के प्रधानमंत्री, दिल्ली की मुख्यमंत्री, एलजी साहब, मेयर, जोन चेयरमैन सहित सभी भाजपा के हैं। जिस वार्ड में यह हादसा हुआ, वहां के विधायक व पार्षद भी भाजपा के ही हैं। सब कुछ उनके हाथ में होने के बावजूद वे लोगों की जान नहीं बचा सके। 400 गज की जगह में तीन मंजिला इमारत का मलबा 12 दिनों तक नहीं उठाया जा सका है। एक इंसान बिना खाए-पिए ज्यादा से ज्यादा दो दिन जिंदा रह सकता है, 12 दिन में तो किसी के बचने की उम्मीद भी नहीं बचती। आम आदमी पार्टी मांग करती है कि स्थानीय लोगों के अनुसार मौत के जो आंकड़े छिपाए जा रहे हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाए। रेस्क्यू तेज किया जाए और वहां से जल्द से जल्द मलबा हटवाकर लोगों को बचाया जाए।

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