योग जीवन जीने की कला है -आचार्य श्रुति सेतिया
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस पर श्रद्धासुमन किये अर्पित
गाजियाबाद,मंगलवार 23 जून 2026,केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में जीवन में योग की महत्ता विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 790 वाँ वेबीनार था।
वैदिक विदुषी श्रुति सेतिया ने कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में तनाव,चिंता और असंतुलित दिनचर्या आम समस्या बन गई है।ऐसे में योग केवल एक व्यायाम नहीं,बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने की कला है।योग शरीर,मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।यह हमें शारीरिक शक्ति,मानसिक शांति और सकारात्मक सोच उत्पन्न
करता है।
नियमित योगाभ्यास से शरीर लचीला और ऊर्जावान बनता है।वहीं प्राणायाम और ध्यान मन को एकाग्र तथा तनावमुक्त करने में सहायता करते हैं।योग हमें वर्तमान क्षण में जीना सिखाता है और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि योग अनेक जीवनशैली संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायक हो सकता है।
योग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके लिए किसी विशेष साधन या स्थान की आवश्यकता नहीं होती।इसे हर आयु का व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार अपना सकता है।
यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में कुछ समय योग के लिए निकाले,तो न केवल उसका स्वास्थ्य बेहतर होगा,बल्कि समाज में शांति,अनुशासन और सकारात्मकता का वातावरण बनेगा।योग भारत की अमूल्य धरोहर है,इसे केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर जीवन का अभिन्न अंग बनाना ही सच्चे अर्थों में योग का सम्मान है।योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं बनाता बल्कि जीवन को संतुलित,सार्थक और आनंदमय बनाता है।
मुख्य अतिथि कृष्णा पाहुजा व अध्यक्ष राजश्री यादव ने भी योग की महत्ता पर विचार रखे।परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया।प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
गायिका कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा ,शोभा बत्रा ,सुधीर बंसल कमला हंस, संतोष धर ,प्रतिभा कटारिया प्रवीना ठक्कर आदि ने मधुर भजन सुनाए।
प्रदेश अध्यक्ष योगी प्रवीण आर्य ने प्रखर राष्ट्रवादी नेता,महान चिंतक,भारत की एकता और अखंडता के लिए अपना बलिदान देने वाले जनसंघ के संस्थापक श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी बलिदान दिवस पर वैचारिक श्रद्धासुमन अर्पित किये।












