संसद मार्च मामले पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई कल
अनिल कुमार गुप्ता दिल्ली
नई दिल्ली: संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती के मामले में दायर याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले को 22 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को आयोजित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। याचिकाकर्ताओं ने इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप और कथित कार्रवाई की जांच की मांग की है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने मामले की गंभीरता का हवाला देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। उनका कहना था कि संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस द्वारा कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया, जिसकी तत्काल न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, “अदालत को इन सब में न घसीटें।” हालांकि, अदालत ने याचिका को खारिज नहीं किया और इसे 22 जुलाई को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की ओर से पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी है। इसी आंदोलन के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 28 जून से आमरण अनशन शुरू किया था। लगभग 20 दिनों तक अनशन करने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके बेहतर इलाज के लिए उन्हें मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित करने के निर्देश भी दिए।












