झाबुआ (थांदला) माणक लाल जैन
प्रथम पुरोहित ईश सेवक फादर चार्ल्स के धन्य होने घोषित की प्रक्रिया तेज।
थांदला…. विगत वर्षों से प्रथम पुरोहित ईश सेवक फादर चार्ल्स कपुचिन जोकि सन 1896में झाबुआ मालवा क्षेत्र केलिए थांदला आए थे उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जब इस क्षेत्र में घना जंगल था ,न ही रोड़ और न कोई आवागमन के साधन हीं थे उस समय आकर शिक्षा के लिए स्कूल एवं ईलाज के लिए अस्पताल शुरू किया उसी समय 1899 से 1900 के बीच भयंकर अकाल पड़ा अकालके साथ हैजा जैसी महामारी फैल गई उसमें सैकड़ों लोग मरने लगे। उनके साथी लाशों को दफनाकर तथा रोगियों का उपचार कर अपनी सेवाएं दे रहे थे जिसमें रोगियों की सेवा करते हुए फादर चार्ल्स कपुचिन स्वयं और उनका एक साथी ब्रदर का हैजा की बीमारी के चपेट में आ गए जिसमें ब्रदर की मृत्यु हो गई। फिर भी फादर चार्ल्स अपनी सेवाएं देते रहे ऐसी परिस्थिति में तत्कालीन राजा उदयसिंह की आज्ञा से चैनपुरी माता मरियम की मंदिर की स्थापना की जोकि फादर चार्ल्स कपुचिन द्वारा माता मरियम से मन्नत लेकर महामारी से बचने पर सन् 1904 चैनपुरी माता मरियम के मंदिर का निर्माण किया गया। इसी प्रकार फादर चार्ल्स कपुचिन द्वारा सन् 1907 में थांदला चर्च का निर्माण किया गया। उनके द्वारा किए गए साहसिक एवं प्रेरणादायक कार्यों को स्मरण करते हुए उनके धन्य एवं संत घोषित होने के लिए नौवें ना प्रार्थना बाइबल अखंड पाठ आराधना मिसाएं रोजरी प्रार्थना अर्पित की जा रही है जिससे ईश्वरीय अनुग्रह से चमत्कारिक रूप से धन्य और संत घोषित हो सके। थांदला चर्च में फादर चार्ल्स कपुचिन को धन्य एवं संत घोषित होने की सभी प्रक्रियाएं थांदला चर्च के पल्ली पुरोहित फादर पीटर कटारा के निर्देशन में पूर्ण की जा रही है। जिसमें थांदला चर्च के सहायक पुरोहितों पल्ली के सदस्यों युवाओं माता मरियम समिति संत मैरिज कॉन्वेंट तथा प्रभु दासी सिस्टर्स द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। ये प्रक्रियाएं ईश सेवक फादर चार्ल्स कपुचिन के धन्य एवं संत घोषित होने तक निरंतर जारी रहेगी।












