June 13, 2026 5:47 am

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फिजियोथेरेपिस्टों को ऐतिहासिक राहत: ‘डॉ.’ लिखने और स्वतंत्र प्रैक्टिस की अनुमति

 

मुख्य संवाददाता

केरल उच्च न्यायालय के एक ऐतिहासिक फैसले से भारत में फिजियोथेरेपी पेशे को नई पहचान मिली है। अब योग्य फिजियोथेरेपिस्ट अपने नाम के आगे ‘डॉ.’ (डॉक्टर) लगा सकेंगे और स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकेंगे।

 

यह मामला इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन (IAPMR) द्वारा दायर याचिका से जुड़ा था, जिसमें फिजियोथेरेपिस्टों द्वारा ‘डॉ.’ शब्द के उपयोग और स्वतंत्र अभ्यास पर आपत्ति जताई गई थी। अदालत ने इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट्स (IAP) के पक्ष में फैसला देते हुए याचिका खारिज कर दी।

 

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि योग्य फिजियोथेरेपिस्ट साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धति का पालन करते हैं और उन्हें बिना किसी अनावश्यक प्रतिबंध के अभ्यास करने का अधिकार है।

 

IAP अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव के. झा और महिला सेल हेड डॉ. रूचि वार्ष्णेय ने इसे पेशे की स्वायत्तता और गरिमा की जीत बताया।

 

हरियाणा IAP के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सर्वोतम चौहान ने कहा कि यह फैसला वर्षों की मेहनत और संघर्ष का परिणाम है और इससे आने वाली पीढ़ियों को पेशेवर सुरक्षा मिलेगी।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, इससे मरीजों को फिजियोथेरेपी सेवाओं तक सीधी और आसान पहुंच मिलेगी तथा फिजियोथेरेपिस्ट प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

 

बॉक्स: क्या बदला इस फैसले से? अब योग्य फिजियोथेरेपिस्ट कानूनी रूप से ‘डॉ.’ लिख सकेंगे स्वतंत्र प्रैक्टिस और क्लीनिक संचालन की अनुमति। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में पहचान। साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक पद्धति को मान्यत, पेशेवर सुरक्षा को कानूनी संरक्षण

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