दिल्ली में प्रदूषण घटाने का स्वदेशी समाधान: बंकरमैन तकनीक का सजीव प्रदर्शन
सुषमा रानी
नई दिल्ली में बंकरमैन हाउस, ईस्ट ऑफ कैलाश में आयोजित “प्रदर्शन एवं प्रेस वार्ता” कार्यक्रम में भारत की स्वदेशी तकनीक बंकरमैन – नकारात्मक लागत पर प्रत्यक्ष कार्बन अवशोषण तकनीक* का सजीव प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख समाचार चैनलों, प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान “बंकरमैन ऑफ इंडिया” मेजर जनरल डॉ. श्रीपाल, वीएसएम (सेवानिवृत्त) ने विस्तार से बताया कि यह तकनीक कार्बन डाइऑक्साइड, सूक्ष्म कण (पीएम 2.5, पीएम 10), कुल वाष्पशील कार्बनिक यौगिक तथा अन्य जहरीली गैसों को सीधे वातावरण से पकड़कर उन्हें खनिजों से भरपूर जैविक खाद में परिवर्तित करती है, अर्थात प्रदूषण को समाप्त कर उसे पर्यावरण के लिए उपयोगी बनाती है।
प्रस्तुति के दौरान यह भी बताया गया कि यह तकनीक केवल प्रदूषण कम नहीं करती, बल्कि वातानुकूलन प्रणालियों में 40 से 60 प्रतिशत तक बिजली की बचत भी करती है। इसी कारण इसे “नकारात्मक लागत तकनीक” कहा जाता है, क्योंकि इससे होने वाली बचत इसकी लागत से अधिक होती है।
मीडिया के प्रश्नों के उत्तर देते हुए डॉ. श्रीपाल ने कहा कि यदि यह तकनीक दिल्ली में बड़े स्तर पर लागू की जाए तो वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है, नागरिकों की स्वास्थ्य समस्याएं कम होंगी, कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बिजली की भारी बचत होगी तथा कार्बन क्रेडिट के रूप में अतिरिक्त आय भी संभव हो सकेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित पत्रकारों और विशेषज्ञों के सामने बंकरमैन प्रणाली की कार्यप्रणाली का सजीव तकनीकी प्रदर्शन किया गया, जिसमें दिखाया गया कि बंद कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कैसे बढ़ता है और प्रणाली चालू होने के बाद वह तेजी से सुरक्षित स्तर पर वापस आ जाता है।
प्रेस वार्ता के दौरान सरकार की नीतियों, तकनीक की विश्वसनीयता, बड़े स्तर पर लागू करने की क्षमता, स्वदेशी विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा, रक्षा उपयोग, आपदा प्रबंधन तथा भविष्य में वैश्विक तापमान वृद्धि को पलटने की संभावनाओं से जुड़े अनेक गंभीर प्रश्न पूछे गए। डॉ. श्रीपाल ने सभी प्रश्नों के वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यावहारिक उत्तर दिए, जिससे उपस्थित मीडिया प्रतिनिधि अत्यंत प्रभावित हुए।
यह स्पष्ट किया गया कि बंकरमैन तकनीक पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित है, किसी भी हानिकारक गैस का उत्सर्जन नहीं करती और नागरिक उपयोग से लेकर रक्षा तथा आपदा परिस्थितियों तक के लिए उपयुक्त है।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि यदि इस तकनीक को नीति स्तर पर समर्थन और प्रोत्साहन मिले, तो भारत प्रदूषण नियंत्रण, ऊर्जा बचत और जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध संघर्ष में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है।
बंकरमैन तकनीक नकारात्मक लागत पर प्रत्यक्ष कार्बन अवशोषण की एक स्वदेशी भारतीय नवाचार है, जो वायु प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ ऊर्जा बचत और पर्यावरण पुनर्स्थापन का कार्य करती है। यह तकनीक प्रदूषण को हटाकर उसे खनिजों से भरपूर जैविक खाद में बदल देती है, जिससे एक सतत और पर्यावरण-अनुकूल चक्र बनता है।












