June 13, 2026 2:55 am

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धर्म व संस्कृति का प्रतीक श्रीराम नवमी पर्व धूमधाम से संपन्न

 

श्रीराम ने भूतल को स्वर्ग बनाने में पूरा जीवन लगा दिया-प्रो.डा अर्चना आर्या

श्रीराम के आचरण को जीवन में उतारें तो पुन: राम राज्य की स्थापना हो सकती है-श्रद्धानन्द शर्मा

गाजियाबाद,शनिवार,28-03-2026 को आर्य समाज राज नगर सेक्टर-5,में वैदिक संस्कृति के प्रकाश सतंभ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम नवमी पर्व धूमधाम से संपन्न हुआ।

मेरठ से पधारे सुप्रसिद्ध भजनोंपदेशक कुलदीप आर्य ने श्रीराम की महिमा पर भजनोपदेश के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य वक्ता प्रो. डा अर्चना प्रिय आर्य (संस्कृत विभागाध्यक्ष कनोहर लाल स्नातकोत्तर महिला महाविद्यालय,मेरठ) ने वैदिक संस्कृति के प्रकाश स्तंभ मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन, व्यक्तित्व,कृतित्व और आदर्शों पर अपने उद्बोधन में कहा कि आज राम नवमी पर्व भारत के लोग ही नहीं अपितु पूरा विश्व मना रहा है।श्रीराम अयोध्या के राजा थे।वे बड़े प्रतापी,सहनशील,धर्मात्मा, प्रजापालक, निष्पाप,निष्कलंक थे।उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ भी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने मानव समाज के लिए आदर्श व्यवहार की मर्यादाएं स्थापित कीं।राम के चरित्र को जानना चाहते हो तो बाल्मिकी रामायण का अध्यन करो।श्रीराम ने भूतल को स्वर्ग बनाने में पूरा जीवन लगा दिया।आज हम उनके जीवन चरित्र से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।हम से उनका जीवन हजारों गुना मर्यादित था।श्रीराम के आदर्शों से भारतीय संस्कार पूर्ण होते हैं उनका जीवन पूर्णता का प्रतीक है जिन जीवन मूल्यों के साथ उन्होंने जीवन व्यतीत किया उन्हें अपने जीवन में उतारना है तभी रामनवमी पर्व मनाना सार्थक है।राम के देश में बढ़ती वृद्धाश्रमों की संख्या चिंता का विषय है इससे लगता है कि राम को हमने नारों तक सीमित कर दिया है।रामायण के पात्रों के जीवन चरित्र को घर ले आइये तभी घर स्वर्गसम होगा।

आर्य प्रतिनिधि सभा उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित सदस्य श्रद्धानंद शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज बहुत ही शुभ दिन राम नवमी पर्व है यदि हम श्रीराम के आचरण को जीवन में उतारें तो पुन: राम राज्य की स्थापना हो सकती है और देश पुनः विश्व गुरु के पद पर प्रतिष्ठित हो सकता है।मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने रूढ़ियों व कुरितीयों का समूल नष्ट कर नई क्रांति का शंखनाद किया शबरी के बेर खाकर सामाजिक समरसता और बराबरी का संदेश जनमानस को दिया।

मंच का कुशल संचालन करते हुए समाज के यशस्वी मंत्री चौधरी सत्यवीर ने कहा कि श्रीराम ने समाज व राष्ट्र के लिए वनवास ग्रहण कर माता पिता की आज्ञा पालन कर संस्कारवान संतान का संदेश दिया उनका जीवन समाज के लिए समर्पित एक अच्छे भाई सुपुत्र और आदर्श राजा रहे हमें उनके गुणों को जीवन में आत्म सात करने का संकल्प लेना चाहिए।

डा वीरेन्द्र नाथ सरदाना ने धन्यवाद ज्ञापित किया।ओर कहा अपने महान् पुरुषों के आदर्शों को अपने अपने जीवन में धारण करना ही मानव जाति के लिये अपने धर्म एवं संस्कृति की रक्षा का सर्वोत्तम कार्य है।

इस अवसर पर मुख्य रूप से श्रीमती आशा चौधरी,वन्दना अरोड़ा,कोशल गुप्ता,सर्वश्री विजय पाल कसाना,सुरेश गर्ग,मोती लाल गर्ग,हरशरण त्यागी, प्रवीण आर्य, शशिबल गुप्ता, सुधीर धमीजा,डा प्रमोद सक्सेना,प्रदीप छाबड़ा, चौधरी मंगल सिंह, के के यादव, प्रमोद चौधरी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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