June 13, 2026 1:29 am

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दो पहियों पर सपनों की उड़ान! डॉ. विक्रम चौरसिया

दो पहियों पर सपनों की उड़ान! डॉ. विक्रम चौरसिया
“दो पहियों की यह सवारी,स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों की रखवाली।”एक छोटे से गाँव में रहने वाला एक युवा प्रतिदिन अपनी पुरानी साइकिल से 8 किलोमीटर दूर स्कूल जाया करता था। बरसात हो, तपती गर्मी हो या ठंडी हवाएँ उसकी साइकिल कभी नहीं रुकी। लोग अक्सर उसका मज़ाक उड़ाते थे, लेकिन वह मुस्कुराकर कहता था “धीमी सही, पर मेरी साइकिल मुझे मेरे सपनों तक जरूर पहुँचाएगी।”वर्षों बाद वही युवा एक अधिकारी बना। जब उससे उसकी सफलता का रहस्य पूछा गया, तो उसने मुस्कुराते हुए कहा “मेरी पहली प्रेरणा मेरी साइकिल थी, जिसने मुझे संतुलन, संघर्ष और लगातार आगे बढ़ना सिखाया।”
मैं स्वयं भी बचपन से ही साइकिल का उपयोग करता रहा हूँ। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रतिदिन साइकिल से ही आना-जाना होता हैं। सुबह की ताज़ी हवा में साइकिल चलाते हुए निकलना, रास्तों की हलचल को महसूस करना और रात में लौटते समय दिनभर की यादों के साथ सफर तय करना यह केवल यात्रा नहीं, बल्कि जीवन का आनंद है। वह सुकून और स्वतंत्रता शायद किसी बाइक या कार में कभी महसूस नहीं हो सकती।ज्ञातव्य हो कि प्रत्येक वर्ष 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि साइकिल केवल दो पहियों का वाहन नहीं, बल्कि मेहनत, सादगी, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है।आज पूरी दुनिया प्रदूषण, ट्रैफिक और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से जूझ रही है। लोग सुविधाओं की दौड़ में स्वास्थ्य और प्रकृति दोनों को पीछे छोड़ते जा रहे हैं। ऐसे समय में साइकिल एक नई उम्मीद बनकर सामने आती है। यह न पेट्रोल माँगती है, न धुआँ छोड़ती है और न ही पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है।
कहा जाता है “जिस समाज में साइकिल चलती है, वहाँ स्वास्थ्य, समानता और स्वच्छता साथ-साथ चलती है।”
यूरोप के अनेक विकसित देशों में मंत्री, अधिकारी और विद्यार्थी तक साइकिल का उपयोग करते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि भविष्य बड़ी गाड़ियों से नहीं, बल्कि स्वच्छ सोच और स्वस्थ जीवनशैली से बनता है।आज आवश्यकता इस बात की है कि हम साइकिल को मजबूरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझें। छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाएँ, बच्चों को इसके लिए प्रेरित करें और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण दें।
अंत में बस इतना ही कहूँगा “साइकिल केवल रास्ता तय नहीं करती,
यह इंसान को संघर्ष से सफलता तक पहुँचने का हौसला भी देती है।

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