June 13, 2026 2:41 am

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मानवता, सत्य और राष्ट्र ही जीवन का सर्वोच्च धर्म – डॉ. विक्रम चौरसिया “मैत्रेय”

मानवता, सत्य और राष्ट्र ही जीवन का सर्वोच्च धर्म – डॉ. विक्रम चौरसिया “मैत्रेय”
एक बार एक जिज्ञासु युवक ने साधु से पूछा“गुरुदेव, जीवन का सबसे बड़ा सत्य क्या है?”साधु ने कोई उत्तर नहीं दिया और उसे श्मशान घाट ले गए। वहाँ कई चिताएँ जल रही थीं। कुछ क्षण मौन रहने के बाद साधु ने शांत स्वर में कहा“देखो, यहाँ न कोई राजा है, न कोई गरीब; न कोई ज्ञानी है, न कोई सामान्य। अंत में सभी एक ही सत्य पर पहुँच जाते हैं सब मिट्टी में मिल जाते हैं।”फिर साधु ने गंभीर स्वर में कहा“जब अंत सभी का समान है, तो जीवन में इतना अहंकार, छल, ईर्ष्या और द्वेष क्यों?”यह प्रसंग जीवन के सबसे गहरे सत्य की ओर संकेत करता है मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद, धन या शक्ति से नहीं, बल्कि उसके चरित्र, करुणा और मानवता से होती है। जो व्यक्ति जीवन की नश्वरता को समझ लेता है, वह दूसरों को नीचा दिखाने में नहीं, बल्कि उनके जीवन को ऊँचा उठाने में अपना उद्देश्य खोजता है।जीवन में हमें अच्छे और कठिन दोनों प्रकार के अनुभव और लोग मिलते हैं। अच्छे लोग प्रेरणा देते हैं, जबकि कठिन परिस्थितियाँ हमें यह सिखाती हैं कि चरित्र, संस्कार और सत्य का वास्तविक मूल्य क्या है। समय ही वह दर्पण है जिसमें मनुष्य का असली स्वरूप स्पष्ट होता है।इसलिए किसी के व्यवहार से टूटना नहीं चाहिए, बल्कि उससे सीख लेना ही बुद्धिमत्ता है। यदि व्यक्ति सत्य, ईमानदारी और न्याय के मार्ग पर चलता है, तो विरोध और बाधाएँ स्वाभाविक हैं। इतिहास साक्षी है कि सत्य का मार्ग कठिन अवश्य होता है, परंतु अंततः विजय सत्य की ही होती है।सत्य को सिद्ध करने के लिए शोर की आवश्यकता नहीं होती, समय स्वयं उसका सबसे बड़ा प्रमाण बन जाता है।समाज में ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ की प्रवृत्तियाँ अक्सर दिखाई देती हैं। कुछ लोग क्षणिक लाभ या झूठी प्रतिष्ठा के लिए छल और कपट का सहारा लेते हैं। परंतु ऐसा मार्ग अधिक समय तक टिक नहीं पाता। अंततः ऐसे कर्म मनुष्य को भीतर से ही तोड़ देते हैं, और समय का न्याय सबसे कठोर सिद्ध होता है।
जीवन का संदेश स्पष्ट है अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते और सत्य कभी पराजित नहीं होता। नफरत का उत्तर नफरत नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मैत्री है।समाज को तोड़ना सरल है, पर उसे जोड़ना ही सच्ची महानता है। हमें ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहाँ जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र और ऊँच-नीच के लिए कोई स्थान न हो, और मनुष्य का मूल्य उसकी मानवता, करुणा और कर्म से आँका जाए।महान महापुरुषों ने सदैव समता, करुणा, भाईचारे और मानव कल्याण का संदेश दिया है। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी एकता, सहिष्णुता और परस्पर विश्वास में निहित होती है।अतः हम सब मिलकर एक ऐसे भारत के निर्माण का संकल्प लें जहाँ मानवता सर्वोपरि हो, सत्य सर्वोच्च हो और राष्ट्र सर्वोपरि हो।चिंतक / मेंटर / एक्टिविस्ट/दिल्ली विश्वविद्यालय

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