October 17, 2026 9:21 pm

भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ ट्रस्ट

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हे मेरे ईश्वर-अल्लाह “कविता”

हे मेरे ईश्वर-अल्लाह,मेरी बस यही विनती है,

प्रेम से भरी हुई आँखें देना,हर जीव के लिए ममता रहे

श्रद्धा से झुका हुआ सिर देना,अहंकार न रहे ,

सहयोग करते हुए हाथ देना, हर दुखी का जीवन सँवारते रहे

 

सहयोग के उन हाथों को सेवा का पावन वरदान देना

सत्यपथ पर चलते हुए पाँव देना,अन्याय की राह न देना

सिमरन-भक्ति करता हुआ मन देना, हर साँस में तेरा नाम देना

विनम्रता से भरा हृदय देना,सबको अपना बनाए वरदान देना

 

सबको अपना मानूँ,ऐसी वाणी भी मधुर बना देना

कटु शब्दों के स्थान पर मुस्कानों का अमृत बरसा देना।

क्षमा का ऐसा दीप जलाना, क्रोध का हर अँधेरा हर लेना

करुणा की गंगा बहाना,सूखे मनों को भी तर कर देनाँ

 

करुणा की उस गंगा में विश्वास की धारा भी बहती रहे

हर कठिनाई में तेरी कृपा मेरा अटल सहारा बनती रहे।

संघर्षों में धैर्य देना,सफलता में सदा विनम्रता रहे

हर कर्म ऐसा कराना,तेरा ही यश बढ़ता रहे।

 

तेरा यश ही मेरी पहचान बने,यही जीवन का सम्मान देना

हर पल तेरा शुकराना हो,हर साँस में तेरा ही गुणगान देना

किशन जब तक यह जीवन रहे,तेरी राह का मुसाफ़िर रहूँ

हे मेरे ईश्वर-अल्लाह,तेरी रज़ा में ही हर पल,राज़ी रहूँ

 

 

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