महामना मालवीय की शिक्षा-परंपरा और डॉ. राधाकृष्णन : शिक्षक दिवस का गौरवशाली संबंध
जिस महामना ने काशी में शिक्षा का मंदिर बनाया, उसी महान परंपरा को आगे बढ़ाया भारत के महान शिक्षक ने
5 सितंबर—शिक्षक दिवस भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् एवं देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को स्मरण करने के साथ-साथ भारत की उस गौरवशाली शिक्षा-परंपरा को नमन करने का अवसर है, जिसकी आधारशिला राष्ट्रनिर्माता भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जैसे महापुरुषों ने रखी।
महामना मालवीय जी का स्वप्न था कि भारत में ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित हो, जिसमें आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी ज्ञान के साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार, चरित्र और राष्ट्रभावना का समावेश हो। इसी महान उद्देश्य की परिणति काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की स्थापना के रूप में हुई। महामना ने इस विश्वविद्यालय को केवल उच्च शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला के रूप में विकसित करने का प्रयास किया।
महामना के बाद इस महान शिक्षा-परंपरा को आगे बढ़ाने का दायित्व जिस व्यक्तित्व ने संभाला, वे थे भारत के महान दार्शनिक और शिक्षक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अभिलेखों के अनुसार उन्होंने 1939 से 1948 तक विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया।
यह अपने आप में अत्यंत गौरवशाली संयोग है कि जिस विश्वविद्यालय की कल्पना और स्थापना में महामना मालवीय जी ने अपना जीवन समर्पित किया, उसी विश्वविद्यालय की बागडोर आगे चलकर ऐसे महान शिक्षक के हाथों में आई, जिन्होंने भारतीय दर्शन और शिक्षा को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया तथा आगे चलकर स्वतंत्र भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति बने। वर्ष 1954 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1939 में महामना मालवीय जी ने डॉ. राधाकृष्णन को काशी हिंदू विश्वविद्यालय का कुलपति बनने के लिए आमंत्रित किया। प्रारंभ में अपनी अन्य जिम्मेदारियों के कारण डॉ. राधाकृष्णन इस दायित्व को स्वीकार करने में संकोच कर रहे थे, लेकिन महामना के आग्रह और विश्वविद्यालय के प्रति उनके समर्पण ने उन्हें यह जिम्मेदारी स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया। सितंबर 1939 में विश्वविद्यालय की विशेष बैठक में उनके कुलपति चुने जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
यह केवल एक कुलपति द्वारा दूसरे कुलपति को दायित्व सौंपने का प्रसंग नहीं था, बल्कि यह एक महान शिक्षा-दृष्टि का दूसरे महान शिक्षाविद् तक हस्तांतरण था।
महामना मालवीय जी का मानना था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जिनमें ज्ञान के साथ चरित्र, कर्तव्यबोध और राष्ट्र के प्रति समर्पण हो। डॉ. राधाकृष्णन भी शिक्षा को मनुष्य के व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाली शक्ति मानते थे। यही कारण है कि दोनों महापुरुषों की शिक्षा-दृष्टि में गहरा साम्य दिखाई देता है।
डॉ. राधाकृष्णन का जीवन इस विचार का उदाहरण है कि सच्चा शिक्षक केवल कक्षा में पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह समाज और राष्ट्र को दिशा देने वाला मार्गदर्शक होता है। BHU में उनके कार्यकाल से जुड़े विवरण बताते हैं कि उन्होंने विश्वविद्यालय की सेवा को अत्यंत समर्पण के साथ निभाया और विद्यार्थियों के बीच ज्ञान, अनुशासन तथा मानवीय मूल्यों को महत्व दिया।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भी उनका व्यक्तित्व दृढ़ता के साथ सामने आया। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के समय ब्रिटिश प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश कर छात्रों को गिरफ्तार करने के प्रयास के बीच डॉ. राधाकृष्णन ने विश्वविद्यालय की गरिमा और विद्यार्थियों की सुरक्षा के पक्ष में दृढ़ रुख अपनाया।
5 सितंबर को उनकी जयंती के अवसर पर देशभर में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें यह स्मरण कराता है कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान या डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, विचार, विवेक और जीवन-दृष्टि का निर्माण करना है।
आज आवश्यकता है कि हम महामना मालवीय और डॉ. राधाकृष्णन की शिक्षा-दृष्टि से प्रेरणा लेकर ऐसी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करें, जो युवाओं में ज्ञान, चरित्र, संस्कार, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवीय संवेदना और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का विकास करे।
शिक्षक दिवस पर महामना मालवीय और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को नमन करना वस्तुतः भारत की उस महान शिक्षा-परंपरा को नमन करना है, जिसने शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का माध्यम माना। एक ने काशी में ज्ञान का विशाल दीप प्रज्वलित किया और दूसरे ने उसी दीप की लौ को आगे बढ़ाते हुए भारतीय शिक्षा एवं दर्शन की प्रतिष्ठा को विश्व स्तर तक पहुंचाया।
“शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, जीवन को दिशा देता है।”
श्रीकृष्ण गौतम
राष्ट्रीय सचिव, महामना मालवीय मिशन, नई दिल्ली












