*अडानी को बिजली का ठेका देने के लिए उत्तराखंड में टेंडर के 86 में से 84 नियम बदले गए- कांग्रेस*
पवन खेड़ा का खुलासा: अडानी के छत्तीसगढ़ स्थित प्लांट से उत्तराखंड के लिए 25 साल तक बिजली खरीदने के लिए पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट किया रद्द
‘टेंडर देने के लिए प्लांट उत्तराखंड के बाहर भी लगाने की शर्त जोड़ी और दूसरे राज्य से बिजली लाने की ट्रांसमिशन लागत जनता पर डाली’
पूछा: ‘मोडानी मॉडल’ को सफल करने के लिए इतने नियम क्यों तोड़े गए?
नई दिल्ली, 17 सितंबर
कांग्रेस ने खुलासा किया है कि उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने अडानी पावर के छत्तीसगढ़ स्थित प्लांट से 25 साल तक बिजली खरीदने का रास्ता साफ करने के लिए टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किए और यूजेवीएन-टीएचडीसी की प्रस्तावित सरकारी परियोजना को रद्द कर दिया। पार्टी ने कहा कि देशभर की भाजपा सरकारें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूंजीपति मित्र अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं।
कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए पार्टी के मीडिया एवं पब्लिसिटी के चेयरमैन पवन खेड़ा ने बताया कि 16 जनवरी 2025 को थर्मल पावर प्लांट लगाने के लिए यूजेवीएन-टीएचडीसी के संयुक्त पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट को अचानक रद्द कर दिया गया। इसके कुछ दिन बाद, 3 फरवरी 2025 को उत्तराखंड सरकार द्वारा नया टेंडर जारी किया गया और उसी दिन अडानी पावर ने छत्तीसगढ़ के कोरबा में पावर प्लांट के विस्तार के लिए पर्यावरण मंजूरी का आवेदन दिया। इसके बाद टेंडर निकालने के लिए कुल 86 में से 84 शर्तों में बदलाव कर दिए गए। यह सभी बदलाव अडानी को टेंडर देने के लिए हुए। इन बदलावों के तहत पावर प्लांट को उत्तराखंड से बाहर देश के किसी भी हिस्से में लगाने की अनुमति दी गई, पूरे 1,320 मेगावाट बिजली की आपूर्ति एक ही बिडर से लेने की बाध्यता तय की गई और दूसरे राज्य से बिजली लाने की ट्रांसमिशन लागत जनता पर डाल दी गई।
राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि निर्माण की समय सीमा बढ़ाने के अलावा फिक्स्ड चार्ज सीलिंग को 70 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया। इसके तहत प्रदेश द्वारा बिजली न लेने की स्थिति में भी अडानी पावर को 25 साल तक पैसा मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि बिजली उत्तराखंड की जनता के पैसे से खरीदी जाएगी, लेकिन पूरा प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ में चलेगा और इसमें कैबिनेट अप्रूवल भी आया है कि यह प्रोजेक्ट 25 साल तक अडानी के पास रहेगा। उन्होंने कहा कि 1.66 लाख करोड़ रुपये का पावर परचेज एग्रीमेंट 25 अगस्त 2026 से 5.74 रुपये प्रति यूनिट की दर से शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि पैसा उत्तराखंड का, कोयला छत्तीसगढ़ का और फायदा अडानी को दिया जा रहा है।
खेड़ा ने बताया कि वर्ष 2024 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यूजेवीएन-टीएचडीसी के संयुक्त उद्यम वाले पब्लिक सेक्टर प्रोजेक्ट के तहत 1,320 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने और कोयला आपूर्ति के लिए केंद्र को प्रस्ताव भेजा था, ताकि राज्य में बिजली आपूर्ति कम न हो। कोयला मंत्रालय की मंजूरी मिलने के बावजूद 16 जनवरी 2025 को प्रदेश सरकार ने इस संयुक्त उद्यम को अचानक रद्द कर दिया। सरकार ने तर्क दिया कि यह संयुक्त उद्यम समय पर काम पूरा नहीं कर पाएगा, जबकि संयुक्त उद्यम ने तय समय सीमा में कार्य पूरा करने का आश्वासन दिया था।
कांग्रेस नेता ने पूछा कि पुष्कर सिंह धामी सरकार ने यूजेवीएन-टीएचडीसी के प्रस्तावित प्रोजेक्ट को क्यों खत्म किया? टेंडर की शर्तों में बदलाव क्यों किए गए? क्या यह टेंडर एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया था? ऐसी शर्त क्यों रखी गई कि पावर प्लांट उत्तराखंड के बाहर भी लगाया जा सकता है? उन्होंने पूछा कि अडानी पावर को 25 साल का बिजली खरीद समझौता क्यों दिया गया? ‘मोडानी मॉडल’ को सफल करने के लिए इतने नियम क्यों तोड़े गए?












