विजयशंकर चतुर्वेदी की कहानी ‘डेटा नॉट फाउंड’ उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के बी.ए. मेजर पाठ्यक्रम में शामिल
*2026-27 के सत्र से विद्यार्थी पढ़ रहे हैं कहानी, स्नातक हिन्दी के विशेष पेपर ‘इक्कीसवीं सदी का हिन्दी साहित्य’ के लिए तैयार पाठ्यक्रम में मिली जगह*
वरिष्ठ पत्रकार, कवि-कथाकार और वैचारिक लेखक विजयशंकर चतुर्वेदी की कहानी ‘डेटा नॉट फाउंड’ को उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के स्नातक हिन्दी के बी.ए. मेजर पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय के हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं स्नातक अध्ययन मंडल (UGBOS) के अध्यक्ष डॉ. मनोज विश्वकर्मा द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, 2026-27 के सत्र से विद्यार्थी इस कहानी का अध्ययन कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय की पाठ्यक्रम चयन परिषद के अनुसार कहानी को स्नातक हिन्दी के विशेष पेपर ‘इक्कीसवीं सदी का हिन्दी साहित्य’ के लिए विशेषज्ञ प्रोफेसरों द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। विश्वविद्यालय के पत्र में कहानी को आधुनिक मनुष्य के जीवन पर तकनीकी एवं अदृश्य नियंत्रण, उसकी स्वतंत्रता और निजता तथा उनके सामाजिक एवं मानवीय परिणामों को रेखांकित करने वाली रचना बताया गया है। ‘डेटा नॉट फाउंड’ भविष्य के एक ऐसे शहर की कथा है, जहाँ नागरिकों की पहचान, व्यवहार, भावनाएँ और सामाजिक जीवन एक अदृश्य निगरानी-व्यवस्था से संचालित होता है। कहानी अपनी जादुई भाषा-शैली से स्मृति, स्वतंत्रता और मानवीय संबंधों पर कसे शिकंजे को ‘स्मृति-संक्रमण’ के माध्यम से ढीला करती है।
विजयशंकर चतुर्वेदी पिछले तीन दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता और साहित्य में सक्रिय हैं। मध्यप्रदेश के सतना जिले की नागौद तहसील के ग्राम आमा में जन्मे चतुर्वेदी जनसत्ता के संपादकीय परिदृश्य का हिस्सा रहे, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक तथा डिजिटल मीडिया में काम कर चुके हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में उपन्यास ‘विदूषक’, कविता-संग्रह ‘पृथ्वी के लिए तो रुको’, तथा संपादित पुस्तकें ‘समय के सुलगते सरोकार’ और ‘देशनामा–गांवनामा’ शामिल हैं।
उनकी पुस्तक ‘निर्णय का स्थापत्य’ न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन से शीघ्र प्रकाशित होने जा रही है। यह पुस्तक कृत्रिम बुद्धिमत्ता के एल्गोरिद्मिक पर्यावरण में मनुष्य के निर्णय लेने और ह्यूमन एजेंसी पर छाये संकट का दार्शनिक विचार-मंथन है। वहीं ‘डेटा नॉट फाउंड’ शीर्षक कहानी-संग्रह नवरस प्रकाशन, नई दिल्ली से आने वाला है। उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल की गई कहानी इसी संग्रह की शीर्षक कहानी है।
यह उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए उल्लेखनीय है कि समकालीन हिन्दी साहित्य की एक नई कहानी को विश्वविद्यालय के विशेष पाठ्यक्रम में अध्ययन के लिए स्थान मिला है।












