*जातिवाद और आरक्षण विषय पर गोष्ठी सम्पन्न*
*आर्थिक आधार पर आरक्षण हो -अतुल सहगल*
गाजियाबाद,बुधवार 22 सितम्बर 2026, केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में ‘जातिवाद और आरक्षण” विषय पर ऑनलाइन वेबीनार सम्पन्न हुआ य़ह कोरोना काल से 804 वाँ वेबीनार था।
वैदिक प्रवक्ता अतुल सहगल ने विषय की भूमिका प्रस्तुत करते हुए वर्तमान विश्व के परिपेक्ष्य में इस विषय की महत्ता को सामने रखा।सबसे पहले सामान्य युक्तियुक्त ज्ञान के आधार पर यह बताया कि जाति का वास्तविक अर्थ क्या है।वक्ता ने शब्द का मौलिक अर्थ प्रस्तुत करते हुए जाति के सही अभिप्राय और स्वरुप की चर्चा की।वक्ता ने यह तथ्य श्रोताओं के सम्मुख रखा कि जाति जन्म के समय शरीर की रचना व बनावट की परिचायक है।इसलिए आज के भूगोल में बसने वाले 800 करोड़ मनुष्यों की एक ही जाति है।वर्तमान समाज में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जिनको जातियाँ ठहरा कर जातिसूचक नाम दे दिए गए हैं, वे वास्तव में जातियाँ नहीं वर्ण हैं और वर्ण भी जन्म से नहीं, कर्म से निर्धारित और निश्चित होते हैं।यह परिवर्तनशील हैं।वक्ता ने फिर अपना उद्बोधन जातिवाद की ओर मोड़ा और यह बताया कि जातिवाद की जड़ कहाँ है और क्यों यह आज भी भारतीय समाज में इतना व्याप्त है।वक्ता ने विस्तार से जातिवाद से उत्पन्न समस्याओं व इसके दुष्परिणामों की चर्चा की।वक्ता ने यह भी बताया कि भारत के मुस्लिम समाज में भी जातिवाद दृष्टिमान है। वक्ता ने कहा कि भारतवर्ष की 1000 वर्ष की पराधीनता के कारणों में जातिवाद एक बड़ा कारण है। इसके होते हुए समाज का विघटन और विभाजन हुआ।आज भी समाज के वर्गों में परस्पर एकता की कमी और वैमनस्य दिखता है।वक्ता ने ऋग्वेद के 2 विशेष मँत्रों और मनुस्मृति से एक प्रासंगिक श्लोक का उद्धरण देते हुए जातिवाद का खंडन किया और इसे वेद विरुद्ध बताया।वक्ता ने उसके बाद भारत में वर्ष 1947 के बाद जातिवाद को एक आदर्श संविधान और प्रशासन व्यवस्था न बन पाने का बड़ा कारण बताया। वक्ता ने बड़े विस्तार से समझाया कि किस प्रकार जातिवाद ने हमारे देश की राजनीति को दूषित किया है l वक्ता ने तब अपने अगले विषय आरक्षण को सामने रखा और इसे जातिवाद से ही उपजी हुई व्यवस्था बताया।आर्थिक आधार पर आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि जातियों या जातिवाद पर आधारित आरक्षण उचित नहीं लगता।वक्ता ने इस सन्दर्भ में गहन चिंतन और विचार करने की बात कही और एक स्वस्थ, उन्नतिशील समाज का समानता के आधार पर निर्माण करने का आह्वान किया।
मुख्य अतिथि सतीश नागपाल एवं अध्यक्ष कृष्णा पाहुजा ने भी अपने ओजस्वी विचार व्यक्त किए कार्यक्रम का कुशल संचालन राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने व्यक्त किए प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य धन्यवाद ज्ञापित किया।
गायिका कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, शोभा बत्रा, रवीन्द्र गुप्ता, प्रतिभा कटारिया, पिंकी आर्या,
ने भी अपने विचार व्यक्त किए।












