October 17, 2026 6:25 am

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सन्यास आश्रम का 71वाँ स्थपना दिवस समारोह सौल्लास सम्पन्न

*सन्यास आश्रम का 71वाँ स्थपना दिवस समारोह सौल्लास सम्पन्न*

*कर्मों में कुशलता ही योग है-डॉ आर्यनरेश वाचस्पति*

*सारा संसार मनुस्मृति के संविधान को लेकर चल रहा है-ठाकुर विक्रम सिंह*

गाजियाबाद,बुधवार,23-09-2026 शम्भु दयाल दयानन्द वैदिक सन्यास आश्रम दयानन्द नगर का कल 71 वां स्थापना दिवस समारोह विजय पाल कसाना की अध्यक्षता में सौल्लास सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञब्रह्मा डॉ आचार्य आर्यनरेश वाचस्पति ने सामाजिक समरसता यज्ञ कर किया।वेदपाठ संजीव आर्य एवं पं. उदयवीर शास्त्री ने किया।मुख्य यजमान सर्वश्री वीरपाल सिंह मलिक, दिनेश गोयल,अनुपम गोयल चौधरी अजय,राहुल सिंघल श्रीमती अनिल रंजीता मानव अग्रवाल, राजीव गुप्ताआदि रहे।उन्होंने यज्ञमानों के सुखद एवं मंगलमय जीवन की प्रभु से प्रार्थना की।

मुजफ्फरनगर से पधारे आर्य जगत के सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक पंडित सतीश सुमन ने अपने गीत के माध्यम से ऋषि महिमा का गुणगान किया जिसे सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।

यज्ञब्रह्मा डॉ आचार्य आर्यनरेश वाचस्पति ने पातंजल योग की दैनिक जीवन में प्रासंगिकता विषय पर बोलते हुए कहा कि योगाभ्यास शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ठीक है।उन्होने महर्षि पतंजलि के योग दर्शन ओर गीता का स्वाध्याय करने पर बल देते हुए कहा चित्त की वृत्तिओं का निरोध योग है।जीवन समाधान की ओर बढ़ रहा है तो वह योग समाधि है।यदि उलझने बढ़ रही हैं तो योग से दूर हो रहे हैं।योग: कर्मसु कौशलम् कर्मों में कुशलता ही योग है।यह जीवन जीने की एक महान कला है।समत्वं योग उच्यते सफलता और विफलता में एक समान रहना ही योग है।जब यह समत्व भाव हमारे भीतर आ जाता है,तो हमारी कार्यक्षमता अपने आप बढ़ जाती है। सुख-दुःख, लाभ-हानि या जय-पराजय में विचलित न होना और अपने कर्तव्य पथ पर बने रहना ही कर्म का योग है। कर्म ही पूजा है अपने दैनिक कर्तव्यों को पूरी ईमानदारी, निपुणता ओर समाज कल्याण की भावना से करना ही सबसे बड़ा योग है।

मुख्य वक्ता ठाकुर विक्रम सिंह (अध्यक्ष,राष्ट्र निर्माण पार्टी) ने कहा कि महर्षि मनु ही वह प्रथम विधिप्रणेता एवं धर्मगुरु हैं जिन्होंने यज्ञ परम्परा का प्रवर्तन किया।वैदिक संहिताओं में मनु के वचनों को औषध के समान हितकारी ओर गुणकारी कहा है।सारा संसार मनुस्मृति के संविधान को लेकर चल रहा है चारों वर्ण वेदानुकूल हैं।जो पढाता है वह ब्राह्मण है,जो रक्षा करता है क्षत्रिय है,जो वितरित करता है वैश्य है,जो सेवा कार्य करता है शुद्र है।उन्होंने अपने आगामी कार्यक्रम दयानंद दिग्विजय रथ पर पाखंड खण्डनी पताका को फहराकर पूरे देश में घूमाने का एवं विशुद्ध मनुस्मृति का प्रचार करने तथा उनका स्टेचू आदि लगाने की जानकारी दी।

जिला आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष विजयपाल कसाना ने कहा की शिक्षा के साथ संस्कार जरूरी है।

विशिष्ट अतिथि वीरपाल सिंह मलिक (निजी सचिव, राजनीतिक सलाहकार) ने सामाजिक समरसता की सुन्दर बातें बताई ओर कहा इस अभियान को आगे बढ़ाना चाहिए।

मुख्य रुप से केन्द्रीय मंत्री,जयंत चौधरी) प्रवीण चौधरी(उपाध्यक्ष- कार्यकारिणी नगर निगम)सुभाष गर्ग (निदेशक- आर०डी० स्टील) उपस्थित रहे।

अमर स्वामी प्रकाशन विभाग के संपादक लाजपत राय द्वारा पंडित उदयवीर शास्त्री द्वारा लिखी ज्ञान वर्धक पुस्तक राजगुरु एवं सुखदेव पर उन्हें अंगवस्त्र ओढाकर एवं 11000 रुपए की राशि देकर सम्मानित किया गया।

मंच संचालक सत्यकेतु सिंह ने कहा कि हमारी सभी वैदिक परंपराएं यज्ञ से शुरू होती हैं उनको हम घर-घर तक पहुंचाएंगे उन्होंने मनु स्मृति के 12 अध्यायों की विस्तृत जानकारी दी।आश्रमाचार्य जितेंद्र आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

इस अवसर पर सर्वश्री बालेश्वर त्यागी, नरेश त्यागी,सेवा राम त्यागी,प्रवीण आर्य,त्रिलोक शास्त्री,वेद व्यास, चौधरी मंगल सिंह,सुभाष शर्मा, देवेन्द्र मेहता आदि उपस्थित थे।

शांतिपाठ व ऋषिलंगर के साथ समारोह संपन्न हुआ।

 

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