झाबुआ माणक लाल जैन
मालवा की पुण्यभूमि आज एक पुण्य सम्राट राष्ट्रसंत युगप्रभावकाचार्य श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराज के कृपापात्र शिष्यगण – मुनि श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनि श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. का मध्यप्रदेश के विभिन्न नगरों में प्रवास, विहार और प्रवचन से सम्पूर्ण क्षेत्र धर्ममयी हो रहा हे । इसी क्रम में सोमवार को दोनों महात्माओं का मेघनगर से महावीर बाग झाबुआ आगमन हुआ । यहाँ प्रभु दर्शन वंदन किए ।यहाँ से सादगी पूर्ण शोभा यात्रा प्रारम्भ हुई । श्री संघ और परिषद परिवार सम्मिलित हुए । नगर के प्रमुख मार्ग से होते हुए श्री ऋषभदेव बावन जिनालय पहुचे । प्रभु दर्शन वंदन कर प्रवचन हाल में प्रवचन हुए ।मुनिराज द्वय के प्रवचन हुए । इस अवसर पर मुनिराज प्रत्यक्षरत्न विजयजी म सा ने कहा की हमारे जीवन में धर्म क्रिया याने प्रभु पूजन, प्रतिक्रमण, सामयिक आदि अत्यंत प्रभु तक पहुँचने हेतु महत्वपूर्ण आलम्बन क्रियाए हे इसके पश्चात जीवन में समता भाव आना जरूरी हे जिससे आत्मा का स्वरूप समझ सके अन्यथा ये समस्त धर्म क्रिया पुण्य का बंध करवाईगी । पूज्य मुनिराज ने कहाँ की जैसे कीचड़ में चलने के लिए एक डंडे की आवश्यकता होती हे उसी प्रकार जीवन में धर्म मार्ग पर चलने हेतु एक गुरु की आवश्यकता होती हे ।पूज्य मुनिराज पवित्र रत्न विजयजी म सा ने कहा की व्यक्ति “अहम और ममत्व “को जीवन में प्रमुखता से अपनाए हुए हे जिसका कारण अज्ञानता और मिथ्यात्व हे । आपने कहाँ की इसी कारण विनय और विवेक का अभाव हे और वह व्यक्ति सही निर्णय नहीं कर पाता हे और सम्पूर्ण जीवन कर्म जो करवाता हे उसे करता जाता हे ।आपने कहा की संसार में व्यक्ति केवल “प्राप्त “करने में सम्पूर्ण जीवन खपा देता हे । अंत में कुछ भी प्राप्त नहीं होता हे । मनुष्य जीवन की सार्थकता इसी में हे की अहम् और ममत्व को त्याग कर प्रभु वचनों में श्रद्धा रखे पूज्य मुनिराज की निश्रा में पुण्य सम्राट श्रीमद् विजय जयंत सेन सूरीश्वरजी म सा की 97 वी मासिक पुण्य सप्तमी पर विभिन्न धार्मिक आयोजन हुए । सुबह भक्तामंबर पाठ, पुण्य सम्राट की अष्टप्रकारी पूजन, सामूहिक सामायिक और रात्रि में नवकार जाप, जयंत सेन एकतीसा का पाठ और पुण्य सम्राट की आरती की गई । इसके पश्चात अखिल भारतीय राजेन्द्र नवयुवक परिषद के सबसे वरिष्ठ सदस्य श्री अरविंद लोढ़ा को “परिषद गौरव “ की उपाधि से अलंकृत कर श्री संघ और परिषद परिवार ने शाल, श्रीफल, माला से बहुमान कर अभिनंदन पत्र भेट किया । इस अवसर पर समस्त श्री संघ और परिषद परिवार उपस्थित थे












