उज्जैन (नागदा) माणक लाल जैन
नागदा
श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ नागदा एवं जयंतराज चातुर्मास समिति 2025 के तत्वावधान में युगप्रभावक पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वर महाराजा के शिष्यरत्न मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. पवित्ररत्न विजयजी म. सा. की पावनतम निश्रा में 29 जुलाई मंगलवार को भगवान श्री नेमीनाथ का जन्मकल्याणक महोत्सव अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया जाएगा। आयोजन में गिरनार तीर्थ की भावयात्रा, अभिषेक, शंख ध्वनि और छाप अर्पण की दिव्य परंपराएं प्रमुख आकर्षण रहेंगे। साथ ही भावयात्रा हेतु हितभाई जोबट व संगीतकार साहिलभाई धरू सूरत की विशेष प्रस्तुति रहेगी।
प्रमुख आयोजन बिंदु:
भगवान नेमीनाथ जन्म के लक्षणों पर आधारित विशेष प्रवचन, जिसमें शंख लक्षण की महिमा बताई गई ।
भावयात्रा के संघपति ऋषभ सुभाषजी नागदा के निवास स्थान जन्मेजय मार्ग नागदा से प्रभु की भाव यात्रा प्रारंभ होगी जिसमें फल, नेवेद्य, वस्त्र, आभूषण, पूजन-सामग्री व प्रभु उपकरण समर्पित किए जायेगे। कार्यक्रम स्थल पर 25 सीढ़ियों वाली गिरनार तीर्थ की प्रतीक प्रतिकृति पर चढ़कर भक्तों द्वारा भगवान के दर्शन कर पवित्र अभिषेक किये जायेंगे ।
लाभार्थी परिवारों के दो प्रमुख को विशाल चाँदी के कलशों से महाअभिषेक का सौभाग्य मिलेगा , वहीं अन्य परिजन को छोटे कलशों से प्रभु की आराधना में भाग लेगे।आयोजन में औषधीय अभिषेक, दूध, केसर, ब्रास नेवेद्य, दीप व पुष्पों से प्रभु का दिव्य शृंगार होगा।विशेष रूप से शंख बजाने की परंपरा को भावपूर्ण ढंग से निभाया जायेगा।श्रीकृष्ण महाराजा ने शंख बजाकर श्रीशंखेश्वर पार्श्वनाथ प्रभु का आगमन कराया था, इसीलिए शंख प्रभु के जन्म लक्षण के रूप में पूजित है।आयोजन में छोटे-बड़े, महिला-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी उत्साहपूर्वक भाग लेगे। सुबह भक्ताम्बर पाठ से शुरुआत होकर , नवकासी,नगर में भावयात्रा, अभिषेक, भक्ति व धर्मसभा आदि से नगर मे धार्मिक वातावरण बनेगा । भावयात्रा मार्ग पर भक्तगण “जय जय बोलो गिरनार” के उद्घोष करते हुए चलेंगे ।मुनि श्री पवित्ररत्न म.सा. ने प्रवचन में आगे कहा कि श्रावण हो, रमजान हो, चातुर्मास हो या पर्युषण — ये सब आत्मा को जगाने के पर्व हैं। लेकिन जब पर्व आता है, तो हम ग्राहक की कमी, जमीकंद की बिक्री और धंधे की मंदी को लेकर चिंतित हो जाते हैं।
पर याद रखें यह समय व्यापार के लिये नहीं, विचारों के परिवर्तन का है।हम सालभर शरीर को सुख देने में लगे रहते हैं और आत्मा को भुला देते हैं। मेरा-तेरा, कटुता, ईर्ष्या-द्वेष में इतना फँस जाते हैं कि नरक के बीज खुद बो देते हैं।पर जो संयम, दान, चारित्र और सरलता को अपनाता है वही देवगति को प्राप्त करता है।जन्मकल्याणक केवल उत्सव नहीं, आत्मा की जागृति का अवसर है। संयम, दान, चारित्र और समर्पण यही प्रभु को प्रिय है और यही भवमोचन का मार्ग है।”
नेमिनाथ भगवान का जन्म दिन सिर्फ आयोजन नहीं आत्मा का उत्सव है।
यह पर्व हमें दर्शन, चारित्र और आत्मोत्कर्ष का स्मरण कराता है।
जो इसे केवल दिखावा समझता है, वह चूक जाता है पर जो इसे दर्शन का बीज मानकर श्रद्धा से निभाता है, उसे गुरु, प्रभु और मोक्ष — तीनों सुलभ हो जाते हैं।
आयोजन समिति व अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् के राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया कि धर्मसभा में आगामी आयोजनों में इसी भाव के साथ सहभागिता हेतु प्रेरित किया गया।
विशेष स्मरण:
“जो भी द्रव्य प्रभु के लिए लाएं, वह प्रथम और श्रेष्ठ हो।”
नेमीनाथ जन्मकल्याणक केवल मंदिर का नहीं, आत्मा का उत्सव है।”
“जिन शासन की यह अनूठी परंपरा , भक्तिभाव से सबके मन में अमिट छाप छोड़ जायेगा












