November 8, 2026 2:40 am

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महाकुंभ आस्था, विश्वास, सौहार्द और संस्कृतियों के मिलन का महापर्व 

प्रयागराज आज यानी 13 जनवरी 2025 से महाकुंभ 2025 आगाज हो गया है. इसके शुरू होते ही लोग जानना चाहते हैं कि महाकुंभ 2025 कब से कब तक रहेगा, कहां लग रहा है, महाकुंभ का महत्व क्या है, शाही स्नान क्या है, शाही स्नान का महत्व क्या है, महाकुंभ कितने प्रकार का होता है, यहां कैसे पहुंच सकते हैं, कुंभ मेले में शाही स्नान की तिथियां क्या रहेंगी, क्या यह 144 साल बाद वाला महाकुंभ है आदि. अगर आप भी इन सभी सवालों के जवाब जानना चाहते हैं, तो आपके लिए यह लेख बहुत काम आएगा. यहां आप 10 प्वाइंट्स में जानेंगे महाकुंभ मेले से जुड़ी सारी जानकारी.

प्रयागराज में कुंभ मेला 13 जनवरी 2025 पर पौष पूर्णिमा से शुरू होकर 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के दिन तक चलेगा.

महाकुंभ सिर्फ प्रयागराज में ही लगता है. यह मेला 144 वर्षों बाद आयोजित किया जाता है और इस बार प्रयागराज में महाकुंभ मेला लग रहा है. महाकुंभ पहला शाही स्नान शुभ मुहूर्त

महाकुंभ का पहला शाही स्नान आज 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा पर किया जाएगा. पौष पूर्णिमा तिथि 13 जनवरी सुबह 5 बजकर 3 मिनट पर शुरू होकर 14 जनवरी को रात 3 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगी. प्रयागराज में हर 12 साल बाद लगने वाले कुंभ को महाकुंभ कहा जाता है. 144 साल वाला कुंभ कब होगा इसके बारे में दावा नहीं किया जा सकता है, क्योंकि पहला कुंभ कब लगा था, इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती है. अगर पहले कुंभ की जानकारी मिल पाए, तब ही 144 साल बाद वाले कुंभ की सही गड़ना की जा सकती है. हालांकि, प्रयागराज में लगने वाले कुंभ 2025 को महाकुंभ माना जा सकता है.

कुंभ मेले का आयोजन कब, कैसे और कहां होता है?

बृहस्पति के कुंभ राशि में और सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर हरिद्वार में गंगा-तट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है.

  • बृहस्पति के वृषभ राशि में प्रवेश और सूर्य-चंद्रमा के मकर राशि में आने पर प्रयागराज में त्रिवेणी संगम तट पर कुंभ मेला लगता है.
  • बृहस्पति और सूर्य के सिंह राशि में प्रवेश होने पर नासिक में गोदावरी तट पर कुंभ पर्व का आयोजन किया जाता है.
  • बृहस्पति के सिंह राशि में और सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने पर उज्जैन में शिप्रा तट पर कुंभ पर्व का आयोजन होता है.

7. कुंभ कितने प्रकार का होता है

मुख्य रूप से कुंभ मेले चार प्रकार के होते हैं:- कुंभ मेला, अर्ध कुंभ, पूर्ण कुंभ और महाकुंभ.

8. कुंभ में शाही स्नान क्या है?

महाकुंभ की कुछ विशेष तिथियों पर किया गया स्नान शाही स्नान कहा जाता है और सबसे पहले शाही स्नान साधु-संतों द्वारा किया जाता है. महाकुंभ में सभी साधु और संत पवित्र जल में औपचारिक डुबकी लगाने के लिए एकत्र होते हैं. अन्य सभी तीर्थयात्री संतों के बाद स्नान करते हैं.

9. कुंभ में कितने शाही स्नान होते हैं?

2025 के प्रयागराज कुंभ मेले में छह शाही स्नान होंगे. 13 जनवरी 2025 के दिन भद्रावास योग का भी संयोग बन रहा है और इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है.

10. शाही स्नान का क्या महत्व है?

ऐसा माना जाता है कि कुंभ में शाही स्नान करने से व्यक्ति को इस जन्म के साथ ही पिछले जन्म के पापों से भी छुटकारा मिलता है. साथ ही, पितृ शांति और मोक्ष के लिए महाकुंभ में शाही स्नान करना बेहद महत्वपूर्ण माना गया है.

शाही स्नान के नियम क्या हैं?

महाकुंभ में शाही स्नान करने कुछ नियम होते हैं. गृहस्थ लोगों नागा साधुओं बाद ही स्नान करना चाहिए. महाकुंभ में स्नान करते समय 5 डुबकी लगाएं, तभी स्नान पूरा माना जाएगा. शाही स्नान के समय साबुन या शैंपू का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे पवित्र जल अशुद्ध हो सकता है.

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