एटा। फिल्मी पर्दे से राजनैतिक क्षितिज में बड़े ओहदे के रूप में स्थापित हुए यूथ आइकॉन उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में किसान परिवार में जन्मे लोधी राकेश राजपूत की जीवन यात्रा लगातार परिवर्तन और संघर्ष से भरी रही है। अपनी यात्रा को साझा करते हुए फिल्म एक्टर राकेश राजपूत बताते है एथलेटिक्स, कला, प्रशासन और राजनीति चारों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने का यह सफर अपनी विविधता और सामाजिक हस्तक्षेप के कारण विविध मोड़ों से गुजरा है। वो बताते हैं बॉडी फिटनेस और पहलवानी में रुचि रखने के कारण सन् 1995 में दिल्ली केसरी का ख़िताब जीतने के बाद राजपूत ने युवाओं को स्वास्थ्य से जोड़ने की दिशा में एक पहल की। उस दौरान डीडीए के डायरेक्टर डी. सरकार से मुलाकात कर उन्होंने सरकारी पार्कों में ओपन जिम स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव मंज़ूर हुआ और दिल्ली के विभिन्न डीडीए पार्कों में जिम स्थापित किए गए। इस पहल ने युवाओं को फिटनेस की ओर आकर्षित किया और यह संदेश दिया—“जो युवा अपने स्वास्थ्य से प्रेम करेगा, वह नशे से दूरी बनाएगा।”
कृषक परिवार से जीवन की पृष्ठभूमि होने के कारण किसान आंदोलन और स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता
दिल्ली से आगे बढ़कर राजपूत ने एटा और कासगंज के किसान आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। 2001, 2011 और 2019 सहित विभिन्न धरना-प्रदर्शनों में किसानों के अधिकार और न्याय के लिए आवाज़ उठाई।
राजपूत बताते उन्होंने एटा की रेल कनेक्टिविटी का मुद्दा भी उनके राजनीतिक व सामाजिक एजेंडे में रहा। एटा में रेलवे स्टेशन होने के बावजूद दिल्ली और लखनऊ से सीधी ट्रेन न होने पर उन्होंने 2014 में जंतर-मंतर पर धरना देते हुए रेल विस्तार की मांग की। उनका कहना था कि “मूलभूत सुविधाओं से वंचित एटा को कनेक्टिविटी के माध्यम से विकास में जोड़ा जाना आवश्यक है।”
अभिनय के क्षेत्र में उपस्थिति का शानदार लेखाजोखा प्रस्तुत करते हुए फिल्मी कैरियर की श्रृंखला बताते हुए उन्होंने बताया-खेल से अभिनय की यात्रा मेरे जीवन का दूसरा अध्याय है। वह बताते हैं ‘अर्जुन पंडित’, ‘फर्ज’, ‘मां तुझे सलाम’, ‘किस्मत’, ‘जल्लाद’, ‘बिग ब्रदर’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। टीवी पर ‘शक्तिमान’ में डॉ. जैकाल के लगभग दस एपिसोड निभाए, जबकि ‘सावधान इंडिया’ में इंस्पेक्टर की भूमिका से अलग छवि बनी। यह धारावाहिक मेरे दिल के बेहद करीब रहा क्योंकि कि यह समाज में घटने वाली सच्ची घटनाओं पर आधारित रहा इसमें मैने पुलिस इंस्पेक्टर का किरदार निभाया। वह बताते हैं उनकी आगामी फिल्म ‘रूचिका’ में भी वे इंस्पेक्टर की भूमिका में नज़र आएँगे।
प्रशासनिक दक्षता से उन्होंने एक दशक तक भारत सरकार में एपीएस के रूप में कार्य किया। इस दौरान वे होम अफेयर्स, लेबर, कम्युनिकेशन एंड आईटी और स्पोर्ट्स मंत्रालय में जुड़े रहे। यह वह समय था जब डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री थे। (2004–2014)। समानांतर राजनीतिक भूमिका में वे कांग्रेस पार्टी में छत्तीसगढ़ राज्य के प्रभारी रहे और सामाजिक सौहार्द तथा संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया।
वर्तमान में लोधी राकेश राजपूत समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव हैं तथा एटा और कासगंज जिलों के एसआईआर के दायित्व के साथ सक्रिय राजनीति में हैं। स्थानीय स्तर पर वे वर्षों से दंगल, कबड्डी, क्रिकेट टूर्नामेंट सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देते हैं। साथ ही ‘भाई-बहन मिलन समारोह’ के अंतर्गत हर वर्ष लगभग एक हजार बहनों से राखी बंधवाने की परंपरा और उन्हें साड़ी-सूट उपहार स्वरूप भेंट करने जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से महिला सम्मान और सुरक्षा के संदेश को समाज में स्थापित किया है।
कुल मिला कर एटा की धरती का यह होनहार युवा बहुआयामी यात्रा कथा का शानदार किरदार निभाते हुए सामाजिक राजनैतिक रूप यूथ मोडीवेटर के रूप में सक्रिय है।किसान के बेटे से दिल्ली केसरी, दिल्ली के पार्कों में फिटनेस मॉडल का प्रणेता, फिल्म अभिनेता, भारत सरकार का प्रशासनिक अधिकारी और आज देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी का राष्ट्रीय सचिव लोधी राकेश राजपूत का जीवंत प्रमाण है जो इस जिले के लिए गौरव की बात है। इनका बहुआयामी अनुभव समाज और राजनीति दोनों के लिए समृद्ध संपदा के रूप में देखा जाना चाहिए।












