आर्य समाज ने शास्त्रार्थों के द्वारा हिन्दू धर्म की रक्षा की-श्रद्धानन्द शर्मा
हम स्वयं को एक परमात्मा की संतान समझकर मानव मात्र से प्रेम करना सीखें-स्वामी आर्यवेश
वर्ण व्यवस्था का चक्र रुकने के कारण ने जाति व्यवस्था का रूप ले लिया-कृष्ण मुनि
गाजियाबाद,शुक्रवार,20 मार्च 2026,जिला आर्य सभा,आर्य केन्द्रीय सभा एवं सन्यास आश्रम के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय आर्य समाज स्थापना दिवस सम्मेलन शम्भु दयाल दयानन्द वैदिक सन्यास आश्रम दयानन्द नगर में हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ यज्ञब्रह्मा आचार्य रणवीर आर्य ने यज्ञ कर किया मुख्य यज्ञमान श्रीमती शिल्पा गर्ग एवं सुभाष गर्ग रहे।उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि ऋषि दयानन्द के मनतव्यों ओर विचारों को परिवार ओर समाज में पहुँचाना होगा तभी लोग जागरूक होंगे तथा यह नवसंवत्सर केवल भारतीय या किसी पंथ विशेष के मानने वालों का नहीं अपितु संपूर्ण विश्व के मानवों के लिए है।
सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष स्वामी आर्य वेश ने कहा कि यह संवत् मानव संवत् है इस कारण हम सब स्वयं को एक परमात्मा की संतान समझकर मानव मात्र से प्रेम करना सीखें।जन्मना ऊंच-नीच की भावना,सांप्रदायिकता,भाषावाद, क्षेत्रीयता,संकीर्णता आदि भेदभाव को पाप मानकर विश्वबंधुत्व एवं प्राणी मात्र के प्रति मैत्री भाव जगाएं।अमानवीयता व दानवता का नाश तथा मानवता की रक्षा का व्रत लें।
सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक वेदपाल आर्य के द्वारा नवसम्वतसर एवं आर्य समाज महिमा गुणगान को भजनोपदेश के माध्यम से सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्रद्धानन्द शर्मा ने कहा कि चेत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ब्रह्माण्ड के स्वामी ने जगत का शुभारम्भ किया। ये सृष्टि नवप्रभात का सूचक है, बधाई देता हूं।अंग्रेजों ओर मुगलों की गुलामी के समय उन्होंने देश को निचोड़ कर रख दिया था।जातिवाद और छुआछूत घुन बनकर खा रहा था,गायत्री मंत्र महिलाओं को बोलने की मनाही सहित अनेक कुरीतियाँ उस समय थी,ऐसे में जब शासक और सरकार उलटे रास्ते पर हों, राष्ट्रीय नवजागरण के पुरोधा स्वामी दयानन्द को आर्य समाज की स्थापना 12 अप्रैल 1978 को मुम्बई में करनी पड़ी।आर्य समाज ने शास्त्रार्थो के द्वारा हिन्दू धर्म की रक्षा की।इसी कारण आर्य समाज की लोकप्रियता बढ़ती चली गई।
कार्यक्रम का कुशल संचालन यशस्वी मंत्री सत्यवीर चौधरी ने किया।उन्होंने कहा स्वामी दयानंद का चिंतन सर्वांगीण विकास का था।
इस अवसर पर विजयपाल कसाना, ओम प्रकाश आर्य, सुभाष गर्ग आदि ने भी अपने विचार रखें।
कार्यक्रम संयोजक सत्यकेतु ने आगंतुकों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्य रूप से कृष्ण कुमार यादव,कृष्ण देव आर्य, सलेक भैया (मकरेड़ा),सेवा राम त्यागी,डा प्रमोद सक्सेना,स्वामी सूर्यवेश, आश्रमचार्य जितेंद्र आर्य,सुभाष शर्मा,वेद व्यास,चौधरी मंगल सिंह, देवेन्द्र मेहता,डा प्रतिभा सिंघल, आशा आर्या,त्रिलोक शास्त्री एवं योगी प्रवीण आर्य आदि उपस्थित थे।












