मुख्य संवाददाता
नई दिल्ली, 2 जुलाई : कभी गहरे अकेलेपन और भावनात्मक संघर्ष से गुजर रहीं 28 वर्षीय इलक्किया की जिंदगी में एक नया मोड़ तब आया, जब उन्होंने वॉयस-फर्स्ट सोशल डिस्कवरी प्लेटफॉर्म एफआरएनडी से जुड़ने का फैसला किया।
जन्म के समय मां को खोने और कोविड महामारी के दौरान पिता के निधन के बाद इलक्किया पूरी तरह अकेली पड़ गई थीं। रिश्तेदारों के साथ रहने के बावजूद उन्हें अपनापन नहीं मिला और उन्होंने अपने दम पर जीवन की नई शुरुआत करने का निर्णय लिया।
स्वभाव से संकोची होने के कारण उनके लिए लोगों से खुलकर बातचीत करना आसान नहीं था। इसी दौरान सोशल मीडिया के जरिए उन्हें एफआरएनडी प्लेटफॉर्म के बारे में जानकारी मिली। एक सुरक्षित और भरोसेमंद मंच की तलाश में उन्होंने इससे जुड़ने का फैसला किया।
प्लेटफॉर्म पर उनकी बातचीत कई ऐसे लोगों से हुई जो अकेलेपन और भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहे थे। इनमें कतर में काम करने वाला एक युवक भी शामिल था, जिसे इलक्किया की दोस्ती और बातचीत से भावनात्मक सहारा मिला।
इसी दौरान उनकी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने भी अपनी मां को खोया था और जीवन से निराश हो चुका था। बातचीत का सिलसिला बढ़ा तो दोनों ने एक-दूसरे के दर्द और संघर्ष को समझा। यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़कर प्यार में बदल गया और इसी वर्ष दोनों विवाह बंधन में बंध गए।
इलक्किया के लिए एफआरएनडी केवल लोगों से जुड़ने का माध्यम नहीं बना, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का जरिया भी साबित हुआ। प्लेटफॉर्म से हुई आय की मदद से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आज वे एक प्रैक्टिसिंग एडवोकेट के रूप में अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी हैं।
इलक्किया की यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही अवसर, भरोसा और साथ किसी की जिंदगी को नई दिशा दे सकते हैं।












