October 17, 2026 11:09 pm

भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ ट्रस्ट

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शख्स नहीं,शख्सियत बनकर जिएँ

शख्स नहीं,शख्सियत बनकर जिएँ

आओ शख्स बनकर नहीं,शख्सियत बनकर जीना सीखें,
अपने कर्मों से हर दिल में उजियारा बोना सीखें।
नाम नहीं,नेकियों की खुशबू पहचान बने
ऐसा जीवन जिएँ कि हर धड़कन सम्मान बने।

शख्स तो समय की राहों में एक दिन खो जाता है
लेकिन चरित्र युगों-युगों तक दीपक-सा जगमगाता है।
दौलत,शोहरत, पद सब यहीं धूल में मिल जाते हैं
सद्कर्मों के अमिट निशान ही इतिहास कहलाते हैं।

वाणी में मिठास हो,व्यवहार में सच्चाई हो,
हर चेहरे पर मुस्कान लाने की मन में अच्छाई हो।
जो गिरते हुए हाथों को थामकर आगे बढ़ाता है,
वही इंसान नहीं,अमर शख्सियत कहलाता है।

जीवन का उद्देश्य केवल खुद तक सीमित न रहे
हर साँस मानवता की सेवा में समर्पित रहे।
अपने अस्तित्व से दुनियाँ में विश्वास जगाइए
प्रेम,करुणा और सत्य का दीप हर मन में जलाइए।

जब अंतिम यात्रा पर यह तन चुपचाप विदा हो जाएगा,
तब केवल कर्मों का उजाला जग में रह जाएगा।
किशन,ऐसा जीवन जिएँ कि हर युग हमें याद करे,
शख्स नहीं,शख्सियत बनकर जीने का संकल्प धरे।

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