November 5, 2026 8:47 pm

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सीएमओ एटा द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष को गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्यवाही पर उठे सवाल

 

अवैध बसूली को लेकर मेडिकल बोर्ड के अध्यक्ष गिरफ्तार हुए इस तथ्य को उजागर करने से आखिर क्यों बचते रहे अफसर ?

एटा। जिले में इन दिनों चल रही आरक्षी पदो पर सीधी भर्ती की चिकित्सा परीक्षण में मेडिकल बोर्ड की रिश्वतखोरी के मामले में प्रशासन और पुलिस ने मिल कर कार्यवाही की है। जिसमें दो डाक्टर जेल भेज दिए गए है। परन्तु हैरत की बात यह है कि पुलिस और प्रशासन ने मीडिया से यह जिंदा सबूत छुपाया है उक्त जेल भेजे गए डाक्टरों में डा अनुभव अग्रवाल मुख्य चिकित्सा अधिकारी एटा के अधीन सामुदायिक स्वा केंद्र जैथरा पर तैनात मेडिकल अफसर है। जो इस आरक्षी चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष हैं। जिन्हें मुख्य चिकित्साधिकारी अपने आधिकारिक अधिकार पत्र निर्गत करते हुए 19 अप्रैल को उक्त चिकित्सा परिषद में नामित किया है। जिसकी सूचना विधवत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एटा सहित विभाग के आला अफसरों को दी गई है।उक्त बोर्ड में तीन अन्य सदस्य भी है जिनमें मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बागवाला की महिला चिकित्सा अधिकारी को भी रखा है। सवाल उठता है जब बोर्ड के अध्यक्ष भ्रष्ट और घूसखोर कार्यों में पकड़े गए है तो बोर्ड के शेष सदस्त पाक साफ कैसे हो सकते है ? इस बोर्ड को गठित करने वाले मुख्य चिकित्सा अधिकारी की जबावदेही पर प्रशासन और पुलिस ने विचार कर कोई नोटिस क्यों नहीं लिया ? यह भी बताया जा रहा नियमित दिव्यांग बोर्ड के प्रकरण में जेल भेजे गए कथित बोर्ड अध्यक्ष के विरुद्ध जांच प्रचलित है फिर सी एम ओ एटा ने ऐसे मेडिकल अफसर को अध्यक्ष क्यों बनाया ? आदि सवाल उठ रहे है जिनका उत्तर न तो प्रशासनिक अधिकारी और न पुलिस दे रही उल्टे इस सबूतों को अनदेखा कर सराहनीय अनावरण के दावे किए जा रहे है। जबकि नियंसुसार इस तरह के बोर्ड में अध्यक्ष के रूप में एसीएमओ स्तर के अधिकारी होते रहे है इनकी उपलब्धता न होने पर कोई भी डिप्टी सी एम ओ अध्यक्ष होता है। विशेषज्ञ सदस्य के रूप में परीक्षण करते है। परन्तु तीन एसी एम ओ तीन डिप्टी सी एम ओ होने के बाद भी मेडिकल अफसरों को खुली छूट किस वजह से दी गई यह भी विवेचकों और प्रशासनिक अधिकारियों को समझना होगा।
निष्पक्ष परीक्षण एवं भ्रष्टाचार विहीन भर्ती को तार तार करते हुए बोर्ड अध्यक्ष ने शासन की पारदर्शी चयन प्रक्रिया को जबरदस्त तरह से धूमिल किया है। पूरी परीक्षण प्रक्रिया संदेहास्पद बन गई है। बताया गया है एटा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी जुलाई माह में प्रशानिक पद से विलग होने वाले इस कारण चलते चलते अपने मुंह लगे लोगों के साथ नियम विरुद्ध कार्य करवा रहे। नियमों के विपरीत मनमर्जी से कार्य करने बाली वर्किंग शैली के अभ्यस्त है। यह कोई नया मामला नहीं है अनेक कनिष्ठ कर्मियों एवं अधिकारियों से काम करवाए जा रहे हैं। इस गिरफ्तारी जेल भेजे जाने की कार्यवाही के बाद मीडिया से गोलमोल जबाव देकर घुमाते रहे। प्रशासन और पुलिस ने मिल कर जब 8 मई को शहर के सुमित्रा डायग्नोटिक सेंटर पर छापामार कार्यवाही की तो वहीं यह खुलासा हो गया मेडिकल बोर्ड छुप कर इस जगह काम कर रहा है और अनुभव अग्रवाल बोर्ड के अध्यक्ष है। परन्तु प्रशासनिक अफसरों ने इसको नजरंदाज करते हुए फकत डॉक्टर बता कर कार्यवाही की जबकि सरकारी नाम पद का जिक्र कर खुलासा बताना चाहिए था। इस बचने बचाने के अंदाज से प्रतीत होता है जिले के जिम्मेदार आला अफसर आखिर कोई है ? जिसे बचाना चाहते है। जबकि मेडिकल परीक्षण के दौरान देखा गया आधा दर्जन से अधिक स्वास्थ विभाग के कर्मी और विभागीय दलाल सक्रिय रहे।
बोर्ड स्थल से अलग अभ्यर्थियों को फेल करने और बसूली के एजेंडे पर यूं ही काम नहीं हो रहा था। विवेचना अधिकारियों को विभागीय आला अफसरों के यहां बोर्ड के सदस्यों की आवाजाही एवं इस प्रक्रिया से जुड़े दल की काल डिटेल देखने का भी काम करना चाहिए था । पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति को भी देखिए जिसमें बताया जा रहा है कि

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