भगवान परशुराम जन्म महोत्सव के समापन के अवसर पर
रिपोर्ट अनमोल कुमार
पटना। देशभर से आए संत-महात्माओं के सान्निध्य में यह आयोजन भक्ति, राष्ट्रवाद और संस्कृति का अद्भुत समागम बन गया।
इस अवसर पर उपस्थित रहे बागेश्वर धाम सरकार के पूज्य आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्होंने बिहार को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि बिहार से उनका आत्मीय रिश्ता है — और यहां वे राजनीति नहीं, रामनीति के उद्देश्य से आए हैं।
उन्होंने कहा कि “पूरे विश्व में अगर एक साथ 12 लाख लोगों ने कथा सुनी तो वह बिहार के तरेत पाली मठ में संभव हुआ, इसलिए बिहार का ऋण जीवन भर नहीं चुकाया जा सकता।”
उन्होंने आगे कहा कि बिहार ने हमें माता सीता, नीति, भक्ति, शिक्षा और ज्ञान दिया है। गांधी मैदान में भव्य जर्मन हैंगर की व्यवस्था के बीच भारी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे ऐतिहासिक बना दिया है।
बाबा बागेश्वर का स्पष्ट संदेश था कि अब समय है कि जातिवाद से ऊपर उठकर सभी को राष्ट्रवाद की ओर समर्पित होना चाहिए।
पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आज ‘सनातन महाकुंभ’ का भव्य आयोजन संपन्न हुआ। यह आयोजन भगवान परशुराम जन्म महोत्सव के समापन पर आयोजित किया गया था, जिसमें देशभर के संत-महात्मा, धार्मिक विचारक और हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे हुई। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और मानसून को देखते हुए आयोजन स्थल पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त जर्मन हैंगर लगाया गया था। आयोजन श्रीराम कर्मभूमि न्यास के संरक्षण में पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे के मार्गदर्शन में हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित रहे बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्होंने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि सनातन धर्म खतरे में नहीं है, लेकिन उस पर बारंबार हमले जरूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “गांधी मैदान में पहले आयोजन की अनुमति नहीं मिली थी, क्योंकि वह बीचोबीच है, लेकिन जैसे ही हमें सूचना मिली, हमने बिना देरी के आने का निर्णय लिया। बिहार से मेरा आत्मीय रिश्ता है। ये भूमि हमें बारंबार बुलाती है।”
उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि “पूरे विश्व में जहां एक साथ 12 लाख लोगों ने कथा सुनी, वह स्थान बिहार का तरेत पाली मठ है। बिहार ने ज्ञान दिया, नीति दी, माता सीता दी — हम इस ऋण को जीवन भर नहीं भूल सकते।”
धीरेन्द्र शास्त्री ( बाबा बागेश्वर) ने अपने वक्तव्य में जोर देते हुए कहा:
“हम राजनीति के चक्कर में नहीं आए हैं, हम रामनीति के चक्कर में आए हैं। हम चाहते हैं कि लोग जातिवाद से ऊपर उठें और राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित हों।”
कार्यक्रम में अन्य प्रमुख संतों में जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी, परमहंस ज्ञानानंद जी महाराज, जगद्गुरु अनंताचार्य जी, और कई महामंडलेश्वर शामिल रहे।
महामहिम राज्यपाल, आरिफ मोहम्मद खान उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिंहा और कई केंद्रीय मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव भी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता और राष्ट्रवादी सोच के प्रसार का संदेश भी लेकर आया।












