झाबुआ माणक लाल जैन
चातुर्मास प्रवेश अवसर पर नागदा में हुआ भक्ति, श्रद्धा और समर्पण का अद्वितीय संगम
नागदा
जैन धर्म की महान परंपरा अनुसार चातुर्मास का पर्व आत्मशुद्धि, संयम और साधना का पर्व माना जाता है। इसी श्रृंखला में राष्ट्रसंत पुण्य सम्राट श्रीमद विजय जयंतसेन सूरीश्वरजी म.सा. के पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी म.सा. एवं आचार्य श्रीमद विजय जयरत्न सूरीश्वरजी म.सा. की पावन आज्ञा एवं सान्निध्य में मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. का नागदा नगर की पुण्यभूमि पर चातुर्मास हेतु मंगलमय प्रवेश हुआ।
इस अवसर पर नगर में धर्म, भक्ति एवं भावनाओं की त्रिवेणी उमड़ पड़ी। जय-जयकारों, भक्तिपूर्ण स्तुति-पाठ और श्रद्धाभाव से ओतप्रोत नगरवासियों ने मुनिराज भगवंतों का भव्य स्वागत किया। प्रवेश समारोह श्रद्धा, गरिमा एवं भावनात्मक उल्लास से परिपूर्ण रहा।
ऐतिहासिक कामली अर्पण
प्रवेश समारोह की विशेष हायलाईट रही कामली अर्पण विधि, जो कि जैन धर्म में मुनिराजों के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है। इस बार यह पुण्य कार्य अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद् के राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों द्वारा अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ संपन्न किया गया।
कामली अर्पण का गौरव
राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रकाशजी छाजेड़ (पारा)
राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री राजेन्द्रजी दंगवाडावाला (बड़नगर)
राष्ट्रीय महामंत्री श्री सुधीर सुरेन्द्रजी लोढ़ा (मन्दसौर)
राष्ट्रीय मंत्री श्री चिरागजी भंसाली (रिंगनोद)
को प्राप्त हुआ।
इन्हीं के साथ परिषद के अन्य पदाधिकारियों एवं नगर के गणमान्य श्रद्धालुओं ने भी समर्पण और भावनाओं के साथ कामली अर्पण कर मुनिराज भगवंतों का वंदन किया।मुनिश्री का वासक्षेप एवं आशीर्वचन
कार्यक्रम के अंत में मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. ने परिषद परिवार एवं समस्त गुरुभक्तों को वासक्षेप कर धर्मलाभ, संयम, श्रावक धर्म और विनय भावों के विकास का आशीर्वाद प्रदान किया।
यह चातुर्मास नागदा नगर के लिए धर्म, संयम और आत्मशुद्धि की साधना का अनुपम अवसर सिद्ध होगा।












