सावन का पहला सोमवार आज पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भोलेनाथ के भक्त ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिरों की ओर उमड़ पड़े। हर तरफ “बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया है, जहाँ भक्त गंगाजल, बेलपत्र, दूध, धतूरा और भांग अर्पित कर भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।
सावन का पहला सोमवार आज पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। भोलेनाथ के भक्त ब्रह्ममुहूर्त से ही मंदिरों की ओर उमड़ पड़े। हर तरफ “बोल बम” और “हर हर महादेव” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया है। शिवालयों को विशेष रूप से सजाया गया है, जहाँ भक्त गंगाजल, बेलपत्र, दूध, धतूरा और भांग अर्पित कर भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं।
इसी कड़ी में गाज़ियाबाद स्थित प्रसिद्ध दूधेश्वर नाथ मंदिर में आज सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। देश के विभिन्न हिस्सों से कांवड़ लेकर पहुंचे श्रद्धालु शिवलिंग पर जल चढ़ाकर पुण्य लाभ ले रहे हैं। मंदिर प्रांगण में सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं, वहीं विभिन्न सेवा समितियों द्वारा जल, प्रसाद और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।
दूधेश्वर नाथ मंदिर के महंत ने बताया कि “दूधेश्वर महादेव का यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन है। मान्यता है कि इसकी स्थापना रावण के पिता ने की थी। एक समय यहां बड़ा टीला बन गया था और एक गाय प्रतिदिन यहाँ आकर स्वतः दूध बहाती थी। इसी कारण इसे दूधेश्वर महादेव कहा गया। सावन के प्रथम सोमवार को लाखों श्रद्धालु दर्शन व जलाभिषेक के लिए यहाँ आते हैं। यहां 40 दिन तक पूजा करने की परंपरा है।”
एक श्रद्धालु ने भावुक होकर कहा, “आज सावन का पहला सोमवार है। हम सुबह से लाइन में लगे थे, अब दर्शन हो गए भगवान के। बहुत ही आनंद की अनुभूति हो रही है।”
स्थानीय पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि “मंदिर परिसर और आस-पास के क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पर्याप्त संख्या में सिविल फोर्स और स्वयंसेवक तैनात हैं, ताकि कोई अव्यवस्था न हो।”
सावन के पहले सोमवार पर भोलेनाथ के प्रति भक्तों की अटूट आस्था और ऊर्जा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि श्रद्धा, सेवा और संकल्प के साथ मनाया गया यह पर्व भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक धरोहर का जीवंत उदाहरण है।












