उज्जैन (नागदा) माणक लाल जैन
नागदा
नगर मे प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी
श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ एवं जयन्तराज चातुर्मास समिति – 2025 के तत्वावधान में नागदा जंक्शन पर 1अगस्त, शुक्रवार से नवकार महामंत्र आराधना का शुभारंभ होने जा रहा है। यह विशिष्ट आराधना युगप्रभावक पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्यरत्न मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजयजी म.सा. की नयनानंदी निश्रा में आयोजित की जा रही है।
आराधना की शुभारम्भ शुक्रवार को प्रातः 6:30 बजे भक्तामर स्तोत्र पाठ से होगा। इसके पश्चात प्रातः 7:00 बजे कुंभस्थापना, प्रभुजी की प्रतिमा,अखंड दीपक एवं नवकार पट्ट के साथ पूज्य गुरुदेव श्री राजेन्द्र सूरीश्वर जी म सा एवं पूज्य पुण्य सम्राट के फोटो की स्थापना आयोजन लाभार्थी परिवार द्वारा किया जाएगा। इसी दिन प्रातः 7:30 बजे नवकार महामंत्र का विधान आरम्भ होगा। सभी आराधकों को प्रवेश क्रिया के साथ मुनि भगवंतों द्वारा अराधको की नवकारवाली(माला) को वाशक्षेपित किया जाएगा।
सभी आराधकों द्वारा क्रमबद्ध रूप से स्थापित नवकार, पूज्य राजेन्द्र सूरिजी व पुण्य सम्राट के फोटो पर वासक्षेप पूजन करना है।
आराधना प्रतिदिन प्रातः से रात्रि तक विविध आराधनात्मक कार्यक्रमों के साथ संपन्न होगी।
प्रत्येक आराधक को प्रतिदिन 20 पक्की नवकार मालाएं नवकार मंडप में अपने निश्चित व नियत स्थान पर ही गिनना होगी।
आराधना के समय स्थान परिवर्तन वर्जित रहेगा। देववंदन तीनों समय (प्रातः, मध्यान्ह एवं संध्या) और प्रतिक्रमण (प्रातः एवं संध्या)व प्रभु पूजन अनिवार्य होगा।
आराधकों के लिए एकासना अनिवार्य है तथा चतुर्दसी को आयंबिल का तप होगा।
वस्त्रविधान (पुरुषों हेतु सफेद धोती व खेश तथा बहनों के लिए श्वेत साड़ी सहित सफेद वस्त्र परिधान) का पालन अनिवार्य रहेगा।
क्रिया मंडप में बहनों को सर ढकना अनिवार्य होगा।
संभावित व अंतराय वाली बहनो का क्रिया मंडप में प्रवेश सर्वथा वर्जित होगा।
नवकार के 68 तीर्थो कीभावयात्रा एवं प्रवचन में सहभागिता तथा नियमित पूजा को प्रत्येक आराधक का परम व अनिवार्य कर्तव्य बताया गया है।
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने इस अखंडआराधना के बारे में बताया कि राष्ट्रसंत गुरूदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा द्वारा(तात्कालिक मुनि जयंतविजय जी मसा) द्वारा इस नवकार महामंत्र की नव दिवसिय आराधना की शुरुआत वर्ष 1961 में निम्बाहेड़ा चातुर्मास से हुई जो स्थानीय स्तर पर थी।बाद में वर्ष 1966 में राणापुर चातुर्मास से इसे व्यापक रूप देकर अखिल भारतीय स्तर पर प्रारंभ हुई। पूज्य गुरुदेव श्रीमद्द विजय जयंतसेन सूरीश्वर जी म सा तत्पश्चात पूज्य गच्छाधिपति श्री नित्यसेन सूरिजी म सा की पावनकारी निश्रा में जहां भी चातुर्मास होते है यह आराधना प्रतिवर्ष श्रावण सुदी सप्तमी से प्रारंभ होकर श्रावण सुदी पूर्णिमा तक अखंड रूपचल रही यह आराधना का यह 65 वां वर्ष की 65वीं नवकार महामंत्र आराधना है ।
पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा से गांव गांव व नगर नगर में आयोजित यह आराधना नागदा नगर में भी परोपकारी गुरुदेव पुण्य सम्राट के शिष्यरत्नों के सान्निध्य में होने जा रही है,जिसमें सवा सौ से अधिक आराधक भाग ले रहे।
पूरी आराधना अवधि में एकासना, आयंबिल एवं पारणा के लाभार्थियों की जानकारी इस प्रकार है।
प्रथम दिवस(एकासना)
सामायिक मंडल द्वारा
द्वितीय दिवस
श्रीजवाहरलाल माणकलाल व्होरा परिवार
तृतीय दिवस
श्रीविरेन्द्रजी, सुशीलजी सचिनजी सकलेचा परिवार
चतुर्थ दिवस
श्रीमती कंचनबाई मिश्रीमल हिंगड़ परिवार
पंचम दिवस
श्रीमिश्रीमलजी हस्तीमलजी कोठारी परिवार
छठा दिवस
श्रीमती चमेलीबाई राजमलजी कटलेचा परिवार
सप्तम दिवस
श्रीमती आजादबाई कान्तीलालजी नागदा परिवार
अष्टम दिवस (आयंबिल)
श्रीजवाहर माणकलालजी व्होरापरिवार
नवम दिवस (एकासना)
शरद स्टोर्स परिवार
समापन दिवस (पारणा)
श्रीमती सोहनबाई जवाहर तांतेड़ परिवार ।
समापन दिवस पर प्रातः 5माला गीनना ,प्रभु पूजन, वासक्षेप पूजन, अनिवार्य है,साथ ही पूज्य मुनि भगवंतों की निश्रा में देववन्दन व निष्कासन विधि सम्पन्न कराई जावेगी।












