देश में आज दशहरा का त्योहार मनाया जा रहा है. दशहरे के दिन आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित दशनामी संन्यासी परंपरा के नागा संन्यासी अखाड़ों में शस्त्र पूजन का विधान है , वर्षों से दशनामी संन्यासी परंपरा से जुड़े नागा संन्यासी इस परंपरा का निर्वहन करते हुए अपने-अपने अखाड़ों में शस्त्र पूजन करते हैं, अखाड़ों में प्राचीन काल से रखे सूर्य प्रकाश और भैरव प्रकाश नामक भालों की देवता के रूप में पूजा की जाती है, वैदिक विधि-विधान के साथ दशनामी संन्यासी इन देवता रूपी भालों की पूजा करते हैं।
इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए आज श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा, कनखल में भैरव प्रकाश और सूर्य प्रकाश नामक भाले देवता के रूप में पूजन किया गया इसके साथ ही आज के युग के हथियार और प्राचीन काल के कई प्रकार के हथियारों की पूजा मंत्रोच्चारण के साथ की गई है ,कुंभ में पेशवाई के आगे रहते हैं देव रूपी दोनों भाले भैरव प्रकाश और सूर्य प्रकाश देवता रूपी भाले कुंभ मेले के अवसर पर अखाड़ों की पेशवाई के आगे चलते हैं ,इन भाला रूपी देवताओं को कुंभ में शाही स्नानों में सबसे पहले गंगा स्नान कराया जाता है, उसके बाद अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर जमात के श्रीमहंत और अन्य नागा साधु स्नान करते हैं, विजयदशमी के अवसर पर अखाड़ों में शस्त्र पूजन का विशेष महत्व है ।












