June 13, 2026 4:25 am

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भारत की सुरसम्राज्ञी का अवसान- आशा भोसले (1933–2026)- एक युग का अंत,एक अमर धरोहर की शुरुआत

भारत की सुरसम्राज्ञी का अवसान- आशा भोसले (1933–2026)- एक युग का अंत,एक अमर धरोहर की शुरुआत

आशा भोसले के निधन के बाद म्यूजिक से लेकर सिनेमा,क्रिकेट और राजनेता भी सभी सिंगर क़ा सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का तांता लगा- पूरा देश शोक में डूबा

आशा भोसले भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत प्रतीक थीं, सात दशकों से अधिक लंबे अपने करियर में संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, ज़ो भारत ही नहीं वैश्विक संगीत जगत की भी एक अमर शख्सियत बनाता है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र

गोंदिया – वैश्विक स्तरपर भारतीय संगीत जगत के लिए 12 अप्रैल 2026 का दिन एक गहरे शोक और ऐतिहासिक क्षति का दिन बन गया,जब सुरों की अद्वितीय जादूगरनी आशा भोसले ने 92 वर्ष की आयु में इस दुनियाँ को अलविदा कह दिया। बताया गया है कि आशा भोसले का अंतिम संस्कार (13 अप्रैल) शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में होगा, जो लोग भी उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि देना चाहते हैं, वे सुबह 11 बजे उनके घर आ सकते हैं। आशा भोसले के निधन के बाद म्यूजिक से लेकर सिनेमा,क्रिकेट और राजनेता भी सभी सिंगर को सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त कर रही हैं,मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस लेने वाली आशा ताई केवल एक गायिका नहीं थीं, बल्कि वे भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जीवंत प्रतीक थीं। सात दशकों से अधिक लंबे अपने करियर में उन्होंने जिस तरह से संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, वह उन्हें केवल भारत ही नहीं बल्किवैश्विक संगीत जगत की भी एक अमर शख्सियत बनाता है।उनके निधन की खबर ने न केवल संगीत प्रेमियों बल्कि राजनीतिक, सांस्कृतिक और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी गहरे शोक में डाल दिया। भारत के राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी,अमित शाह महाराष्ट्र के राज्यपाल मुख्यमंत्री सहित अनेक नेताओं औरकलाकारों ने उन्हेंश्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को अविस्मरणीय बताया। मैं एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र यह बताना चाहूंगा कि आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां संगीत सांसों में बसता था। उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर पहले से ही संगीत की दुनियाँ में एक स्थापित नाम थीं, और इसी वातावरण ने आशा के भीतर भी संगीत के बीज बोए। मात्र 10 वर्ष की आयु में 1943 में उन्होंने अपने गायन करियर कीशुरुआत कर दी थी, जो आगे चलकर एक ऐतिहासिक यात्रा में परिवर्तित हुआ। प्रारंभिक संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपनेअद्वितीय स्वर और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर धीरे-धीरे बॉलीवुड और भारतीय संगीत उद्योग में अपनी अलग पहचान बनाई।1950 के दशक में उन्होंने जिस प्रकार अपनी आवाज का जादू बिखेरा, उसने उन्हें संगीत के आकाश का बुलंद चमकता सितारा बना दिया।
साथियों बात अगर हम उनके करियर का आरंभिक दौर को समझने की करें तो,वह संघर्षों से भरा था। उन्होंने छोटे बजट की फिल्मों में गाकर अपने लिए जगह बनाई और धीरे-धीरे बड़े निर्देशकों और संगीतकारों का ध्यान आकर्षित किया। बिमल रॉय , राज कपूर जैसे दिग्गजों के साथ काम करने का अवसर उन्हें मिला। संगीतकार ओ . पी .नैयर के साथ उनकी जोड़ी ने कई सुपरहिट गीत दिए, लेकिन 1957 में आई फिल्म नया दौर उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म ने उन्हेंमुख्यधारा की सफलता दिलाई और वे भारतीय फिल्म संगीत की अग्रणी गायिकाओं में शामिल हो गईं।आशा भोसले की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी प्रतिभा थी। उन्होंने केवल पारंपरिक फिल्मी गीत ही नहीं गाए, बल्कि गजल, पॉप, भक्ति, शास्त्रीय और लोक संगीत सहित हर शैली में अपनी अद्भुत पकड़ दिखाई। 1981 में आई फिल्म उमराव जान में उनके द्वारा गाई गई गजलें-दिल चीज क्या है’, इन आंखों की मस्ती के, ये क्या जगह है दोस्तों- आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित हैं। इन गीतों ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया और यह साबित किया कि वे केवल एक प्लेबैक सिंगर ही नहीं, बल्कि एक संपूर्ण बहुमुखी की धनी कलाकार थीं।
साथियों बात अगर हम आशा भोसले की उपलब्धियों की करें तो उनकी उपलब्धियां केवल भारत तक सीमित नहीं रहीं। आशा भोसले ने अपने करियर में 20 सेअधिक भाषाओं में गीत गाए, जिसके कारण उनका नाम जीनियस बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड्स में दर्ज हुआ। उन्होंने संगीत को वैश्विक मंच पर भारतीय पहचान दिलाई।उनके गीतों में भारतीयता की खुशबू के साथ-साथ आधुनिकता की झलक भी देखने को मिलती थी, जिसने उन्हें हर पीढ़ी का प्रिय बना दिया।उनका करियर केवल गायन तक सीमित नहीं रहा। 2013 में उन्होंने फिल्म माई के माध्यम से अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा और अपने अभिनय से आलोचकों की प्रशंसा प्राप्त की।2020 में उन्होंने डिजिटल युग के साथ कदम मिलाते हुए अपना यूट्यूब चैनल भी शुरू किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे समय के साथ खुद को ढालने में भी माहिर थीं। 90 वर्ष की आयु के बाद भी उनका मंच पर प्रदर्शन करना उनकी ऊर्जा और संगीत के प्रति समर्पण को दर्शाता है। 2025 में दुबई में उनका कॉन्सर्ट इस बात का जीवंत प्रमाण था कि उम्र उनके लिए केवल एक संख्या थी।
साथियों बात अगर कर हम आशा भोसले का संगीत सफर केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि एक प्रेरणा है इसको समझने की करें तो, उन्होंने हर दौर में खुद को प्रासंगिक बनाए रखा। 1990 और 2000 के दशक में भी उन्होंने रंगीला,लगान,प्यार तूने क्या किया जैसी फिल्मों में अपनी आवाज देकर यह साबित किया कि वे हर पीढ़ी के साथ तालमेल बैठाने में सक्षम हैं।ए.आर .रहमान जैसे आधुनिक संगीतकारों के साथ काम करते हुए उन्होंने अपने संगीत को नई दिशा दी।उनके निधन के बाद पूरे देश और दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें सबसे बहुमुखी कलाकार बताते हुए कहा कि उनका जाना केवल एक कलाकार का नहीं, बल्कि एक युग का अंत है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उनके साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को याद करते हुए कहा कि आशा ताई का संगीत के प्रति समर्पण अद्वितीय था। वहीं तेजसथ्वी यादव ने भी इसे संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
साथियों बात अगर हम आशा भोंसले के जीवन से सीखने की करें तो,उनका जीवन यह सिखाता है कि प्रतिभा,परिश्रम और समर्पण से किसी भी क्षेत्र मेंअमरता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने न केवल संगीत को जिया बल्कि उसे अपने अस्तित्व का हिस्सा बना लिया। उनका हर गीत एक कहानी कहता है, हर सुर एक भावना व्यक्त करता है, और हर धुन एक याद बन जाती है।आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब भी उनकी आवाज हमेशा गूंजती रहेगी,रेडियो पर, फिल्मों में, मंचों पर और हर उस दिल में जिसने कभी उनके गीतों को महसूस किया है। उनका निधन एक शारीरिक अंत हो सकता है, लेकिन उनका संगीत अमर है। आने वाली पीढ़ियां उनके गीतों से प्रेरणा लेंगी और उन्हें एक आदर्श के रूप में देखेंगी।आशा भोसले केवल एक नाम नहीं थीं, वे एक युग थीं,एक ऐसा युग जिसने भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। उनका जाना एक खालीपन छोड़ गया है, जिसे भर पाना असंभव है। लेकिन उनके गीत, उनकी आवाज और उनकी विरासत हमेशा जीवित रहेगी, हमें यह याद दिलाती रहेगी कि सच्चा कलाकार कभी मरता नहीं,वह अपने कला के माध्यम से हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहता है।
साथियों बात अगर हम आशा भोसले क़े निधन पर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति प्रधानमंत्री सहित अनेक नेताओं द्वारा दी गई श्रद्धांजलि की करें तो भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिग्गज गायिका आशा भोंसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे संगीत की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने कहा कि आशा जी की सुरीली और सदाबहार आवाज ने दशकों तक भारतीय संगीत को समृद्ध किया और उनके जाने से संगीत जगत में एक बहुत बड़ा खालीपन आ गया है।भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने प्रसि‍द्ध गायिका आशा भोसले के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।मुझे महान गायिका आशा भोसले जी के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ है। उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी हार्दिक संवेदनाएं। आशा जी अपनी बहुमुखी आवाज से विभिन्न शैलियों में सहजता गा पाई। इससे उन्होंने भावपूर्ण ग़ज़लों और पारंपरिक भजनों में महारत हासिल की और भारतीय संगीत पर एक अमिट छाप छोड़ी।उनकी बेमिसाल आवाज और संगीत की विरासत लाखों लोगों के दिलों में गूंजती रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। ओम शांति।प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज आशा भोसले जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उन्हें भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक बताया।उन्होंने कहा कि उनकी दशकों कीअसाधारण संगीतमय यात्रा ने देश की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और विश्व भर में अनगिनत दिलों को छुआ, चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएँ, उनकी आवाज़ में एक शाश्वत दमक थी, और उन्होंने कहा कि उनके साथ हुई मुलाकातों को वे हमेशा संजोकर रखेंगे।उन्होंने उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। श्री मोदी ने कहा कि वे पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत लोगों के जीवन में सदा गूंजते रहेंगे।पीएम ने एक्‍स पर लिखा:भारत की सबसे प्रतिष्ठित और बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोसले जी के निधन से मैं अत्यंत दुखी हूं। उनकी दशकों की असाधारण संगीतमय यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। चाहे उनकी भावपूर्ण धुनें हों या जीवंत रचनाएं, उनकी आवाज में एक शाश्वत दमक थी। उनके साथ हुई मुलाकातों को मैं हमेशा संजो कर रखूंगा।उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। वे पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।‘ भारत के गृहमंत्री अमित शाह जी ने कहा आज हर भारतीय और विशेषकर मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुःखद दिन है, जब हम सबकी प्रिय आशा भोसले जी हमारे बीच नहीं रहीं।आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया। हर तरह के संगीत में ढल जाने की उनकी अनोखी प्रतिभा हर व्यक्ति का दिल जीत लेती थी। अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी।आशा ताई की आवाज में जितनी कोमलता थी,उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी। उनसे जब भी मुलाकात होती थी, संगीत और कला जैसे अनेक विषयों पर लंबी बातें होती थीं। आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी।ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। ॐ शांति शांति शांतिपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी आशा भोसले के निधन पर शोक जताया। उन्होंने कहा कि आशा भोसले एक ऐसी गायिका थीं, जिन्होंने अपनी आवाज से पीढ़ियों तक लोगों के दिलों पर राज किया। उनके अनुसार, वह सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व भी थीं, जिनसे नई पीढ़ी को सीख मिलती रहेगी।यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा,भारतीय संगीत जगत की स्वर-सम्राज्ञी,महान सुर- साधिका, पद्म विभूषण आशा भोसले जी का निधन बहुत दुखद और कला जगत की अपूरणीय क्षति है। उनकी अद्वितीय गायकी ने भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी मधुर आवाज हमेशा देश वासियों के मन में गूंजती रहेगी। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को सद्गति और शोकाकुल परिजनों और फैंस को ये अपार दुख सहन करने की शक्ति दे।

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