वर्क-फ्रॉम-होम और प्रदूषण से बढ़ता लिवर संकट*
मुख्य संवाददाता
नई दिल्ली:दिल्ली-एनसीआर में वर्क-फ्रॉम-होम (WFH), खराब खानपान और बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति अब एक ‘साइलेंट पब्लिक हेल्थ क्राइसिस’ का रूप लेती जा रही है। यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, मॉडल टाउन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टरों ने बताया कि लिवर रोग अब केवल शराब तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली और प्रदूषण इसके प्रमुख कारण बन चुके हैं।
डॉ. अपूर्व पांडे (गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी एवं हेपेटोलॉजी) और डॉ. शैलेश शर्मा (पीडियाट्रिक्स) ने बताया कि भारत में हर 5 में से 1 व्यक्ति ‘साइलेंट लिवर डिजीज’ के खतरे में है। DiaFib-Liver Study के अनुसार 9,202 लोगों की जांच में 5% में बिना लक्षण वाला सिरोसिस पाया गया। वहीं MASLD के मामले 2050 तक तेजी से बढ़ने का अनुमान है।
दिल्ली-एनसीआर में स्थिति और गंभीर है, जहां 22.8% आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है। डायबिटीज और मोटापे वाले लोगों में यह आंकड़ा 60% से भी अधिक है। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या ग्रामीण इलाकों की तुलना में लगभग 40% ज्यादा देखी जा रही है।
डॉ. पांडे के अनुसार, PM2.5 जैसे प्रदूषक शरीर में जाकर लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं और सूजन व फाइब्रोसिस का कारण बनते हैं। साथ ही WFH के कारण शारीरिक गतिविधि में कमी इस खतरे को और बढ़ा रही है। उनके ओपीडी में आने वाले 30–40% मरीज फैटी लिवर के होते हैं, जिनमें अधिकतर की उम्र 20 से 50 वर्ष के बीच होती है।
चिंताजनक बात यह है कि अब 18–20 साल के युवा और सामान्य वजन वाले लोग भी ‘लीन फैटी लिवर’ का शिकार हो रहे हैं। बच्चों में भी यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। डॉ. शैलेश शर्मा के अनुसार, दिल्ली के लगभग 35% बच्चों में फैटी लिवर के संकेत मिल रहे हैं, जिसका मुख्य कारण फास्ट फूड, स्क्रीन टाइम और व्यायाम की कमी है।
डॉक्टरों ने बताया कि FIB-4 स्कोर और फाइब्रोस्कैन जैसी आधुनिक तकनीकों से लिवर की शुरुआती जांच संभव है। साथ ही आयुष्मान भारत और दिल्ली आरोग्य कोष जैसी योजनाएं इलाज में आर्थिक मदद दे रही हैं।
विशेषज्ञों ने सलाह दी कि लोग संतुलित आहार लें, जंक फूड और मीठे पेय से बचें, नियमित व्यायाम करें और समय-समय पर जांच कराएं। उनका कहना है कि समय रहते पहचान और जीवनशैली में सुधार ही इस ‘साइलेंट किलर’ से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।











