June 13, 2026 4:12 am

भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ ट्रस्ट

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होटल ढाबे मिठाई की दुकान के उत्पाद का मूल्य निर्धारण का किसको अधिकार

 

मिठाई दुकानदारों और होटल ढाबों का खुद का कानून चलता है जब मर्जी हुई तो मनमानी तरीके से कीमत बढ़ा दिया जाता है

ग्राहकों को नहीं देते जीएसटी बिल मनमानी तरीके से करते हैं जीएसटी की चोरी

कौशाम्बी। होटल ढाबे और मिठाई की दुकान में बिकने वाले सामानों के मूल्य निर्धारण का अधिकार किसके पास है या फिर होटल ढाबे और मिठाई की दुकानों का अपना खुद का कानून चल रहा है आम जनता इस बात का जवाब शासन प्रशासन से चाहती है बीते कुछ वर्षों के दौरान होटल ढाबा में खाने पीने के सामानों में मनमानी तरीके से मूल्य वृद्धि कर जनता की जेब में डाका डाला जा रहा है एक उदाहरण के तौर पर होटल ढाबा में एक प्लेट दाल फ्राई का एक सौ रुपए से डेढ़ सौ रुपए और 200 रुपए तक खुलेआम वसूला जा रहा है जबकि एक प्लेट में 100 ग्राम भी तैयार दाल मौजूद नहीं होती है आखिर होटल में दाल फ्राई के नाम पर 2000 किलो दाल बेचने वाले और इसी तरह दो हजार से तीन हजार रुपए किलो से अधिक कीमत पर सब्जी बेचने वाले होटल ढाबे का संचालन करने वाले लोगों को मनमानी तरीके से मूल्य निर्धारण का अधिकार क्या कानून में दिया गया है इससे भी बड़ा सवाल उठता है कि वह एक प्लेट सब्जी दाल में कितना वजन ग्राहक को परोस रहे हैं इसका भी बोर्ड लगाकर होटल ढाबे में प्रदर्शित नहीं किया गया है इससे होटल ढाबे में ग्राहक मनमानी कीमत देने को मजबूर हो गया है इसी तरह मिठाई की दुकानों में भी मनमानी तरीके से मिठाई दुकानदारों द्वारा मूल्य निर्धारण किया जा रहा है मेवा की मिठाई के नाम पर 1000 रुपए किलो से लेकर के 2000 रुपए किलो तक की मिठाई खुलेआम मिठाई की दुकानों में बेचा जाता है मूल्य निर्धारण होटल ढाबे दुकान संचालक खुद कर रहे हैं आखिर मिठाई की दुकान में बिकने वाली मिठाई के मूल्य निर्धारण का अधिकार सरकार ने किस विभाग को दिया है लोगों की बातों को माने तो मूल्य निर्धारण का अधिकार पूर्ति विभाग को सरकार ने दिया है लेकिन होटल ढाबे से लेकर मिठाई की दुकानों तक मनमानी कीमत पर खाने पीने की वस्तुओं को बेचने वाले होटल ढाबा और मिठाई की दुकानों पर कार्यवाही नहीं होती है मिठाई दुकानदारों और होटल ढाबों का खुद का कानून चलता है जब मर्जी हुई तो महंगाई का हवाला देकर मनमानी तरीके से कीमत बढ़ा दिया जाता है

दो दशक के बीच दाल वा सब्जी की कीमत में 20 गुना बढ़ोत्तरी होटल ढाबे में की जा चुकी है एक प्लेट में कितना वजन दाल सब्जी ग्राहकों को दिया जाएगा इस पर नियम कौन बनाएगा एक प्लेट में सौ ग्राम दाल की कीमत डेढ़ सौ रुपए से दो सौ रुपए तक वसूली जा रही है मनमानी कीमत निर्धारित कर ग्राहकों से वसूली करने वाले संचालकों पर सवाल खड़े हो गए हैं कि होटल ढाबे है या फिर ग्राहकों से लुट का अड्डा है डेढ़ हजार रुपए किलो की कीमत पर दाल और तीन हजार रुपए किलो कीमत पर होटल में सब्जी परोसी जा रही है जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार के लोग एक टाइम का भोजन होटल ढाबे में करने के बजाय भूखे रहना पसंद करने लगे हैं इतना ही नहीं होटल में दाल सब्जी की मनमानी कीमत वसूलने के बाद ग्राहकों को जीएसटी बिल नहीं दिया जाता है बड़े पैमाने पर होटल ढाबे में जीएसटी की चोरी खुलेआम हो रही है यही स्थितियां मिठाई की दुकान में है जहां मिठाई की खरीद पर जीएसटी बिल रसीद नहीं दिए जाते हैं और बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की जाती है अधिकतर बड़े होटल ढाबे और मिठाई की दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सीसीटीवी कैमरे की मदद से होटल ढाबे और मिठाई की दुकानों में होने वाली मनमानी की जांच कर दुकानदारों को दंडित कर जीएसटी चोरी रोकी जा सकती है लेकिन विभाग के अधिकारी जीएसटी चोरी रोकने पर भी गंभीर नहीं है होटल ढाबे और मिठाई की दुकानों में प्रतिदिन कितनी बिक्री हो रही है किसको जीएसटी बिल दिया जा रहा है और कितना सामान दिया जा रहा है सीसीटीवी से चेक किए जा सकता है होटल ढाबा में भी ग्राहकों की संख्या सीसीटीवी कैमरे से चेक कर जीएसटी की चोरी रोकी जा सकती है

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