झाबुआ माणक लाल जैन
*सामूहिक क्षमापना का हुआ आयोजन*
*500 से अधिक तपस्वियों के पारणे एवं तपस्वियों व लाभार्थी परिवारों का हुआ बहुमान*
*“क्षमा वीरों का आभूषण है, क्षमा मांगना और क्षमा करना मोक्षमार्गी जीव की निशानी है” — साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी*
झाबुआ। पर्वाधिराज पर्युषण पर्व की आराधना के पश्चात स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में सामूहिक क्षमापना एवं तपस्वी बहुमान का भावपूर्ण आयोजन किया गया। पूज्य विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-7 की पावनकारी शुभ निश्रा में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी महाराज साहेब ने कहा कि “क्षमा वीरों का आभूषण है। क्षमा मांगना कठिन है, लेकिन क्षमा करना उससे भी बड़ा कार्य है। दान देना, तप-जप करना, आराधना एवं धार्मिक अनुष्ठान करना जीव अपनी शक्ति के अनुसार कर सकता है, लेकिन जब सभी जीवों के प्रति हृदय में क्षमा, मैत्री और करुणा के भाव जागृत हो जाते हैं, तभी जीव मोक्ष का अधिकारी बनने की दिशा में अग्रसर होता है।”
उन्होंने कहा कि पर्युषण पर्व केवल तप, जप और धार्मिक क्रियाओं का पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि, मैत्रीभाव और परस्पर क्षमायाचना का पर्व है। सभी तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए उन्होंने उनके तप एवं आराधना की खूब-खूब अनुमोदना की।
इस अवसर पर जैन श्वेतांबर श्री संघ, श्री वर्धमान स्थानकवासी श्री संघ एवं श्री तेरापंथ सभा के सदस्यों ने पूज्य साध्वी श्री भगवंत से सामूहिक रूप से क्षमायाचना की। पूज्य साध्वी जी भगवंत ने भी सकल श्री संघ से परस्पर क्षमायाचना करते हुए सभी के प्रति मैत्री एवं मंगलभाव व्यक्त किया।
500 से अधिक तपस्वियों के हुए पारणे
श्री संघ के रिंकू रूनवाल ने बताया कि कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वप्रथम सभी तपस्वियों ने जिनालय में सेवा-पूजा कर शासन माता की भक्ति की। इसके पश्चात प्रातः 7:30 बजे 11 उपवास, 8 उपवास, अट्टम तप, उपवास, आयंबिल, एकाशना सहित विविध तप आराधना करने वाले 500 से अधिक तपस्वियों के पारणे प्रारंभ हुए।
पारणे का लाभ संघवी वालीबाई समीरमलजी भंडारी की स्मृति में श्रीमती बिंदु यशवंतजी भंडारी परिवार ने लिया।
*1500 से अधिक सामूहिक एकाशनों की आराधना*
पर्युषण पर्व के दौरान आयोजित सामूहिक एकाशना आराधना में प्रतिदिन 200 से अधिक आराधकों ने सहभागिता की। इस प्रकार पर्युषण पर्व के दौरान 1500 से अधिक एकाशनों की आराधना संपन्न हुई।
इस संपूर्ण आराधना का लाभ श्रीमती चंदनबाला चंद्रशेखरजी कांठी की स्मृति में जयेश कुमार चंद्रशेखरजी कांठी, विमल ,सुरेन्द्र मांगीलाल कांठी परिवार ने लिया।
*लाभार्थी परिवारों का किया सम्मान*
सामूहिक पारणा एवं एकाशना आराधना के लाभार्थी कांठी एवं भंडारी परिवार का श्री संघ एवं चातुर्मास समिति की ओर से बहुमान किया गया। बहुमान के लाभार्थी मधुकरजी, निशान, राश्व शाह, श्रीमती नीता, पूजा एवं कु. धर्मी शाह परिवार ने शाल एवं श्रीफल से लाभार्थी परिवारों का सम्मान किया।
श्री संघ के वरिष्ठजनों एवं पदाधिकारियों ने लाभार्थी परिवारों को अभिनंदन पत्र अर्पित कर उनके द्वारा किए गए धार्मिक लाभ की सराहना की।
*दीर्घ तपस्वियों का हुआ बहुमान*
कार्यक्रम में दीर्घ तप आराधना करने वाले तपस्वियों का भी विशेष बहुमान किया गया। 64 प्रहरी पौषध की दीर्घ तप आराधना करने वाले श्रावकरत्न धर्मचंद मेहता एवं रमेशचंद्र छाजेड़ का सम्मान किया गया।
इसके साथ ही 16, 11, 9 एवं 8 उपवास करने वाले तपस्वियों में पंकज अनोखीलालजी कोठारी, रत्नदीप सकलेचा, गौरव छाजेड़, अंकित कटारिया, अंतिम जैन, विपुल जैन, दीपेश सकलेचा, मयंक जैन, पर्व रूनवाल, वैभव कोठारी एवं गौरव कोठारी का बहुमान किया गया।
श्राविकाओं की तप आराधना भी रही प्रेरणादायी
तप आराधना करने वाली श्राविकाओं में श्रीमती निर्मला चौधरी, ममता धनसुख संघवी, राशि छाजेड़, हर्षी छाजेड़, रुचि जैन, नैना मेहता, मंजू कोठारी, श्रेया कोठारी, प्रियंका नाहर, प्राची बरडिया, ज्योति सकलेचा, ऋषिका जैन एवं शीतल कांठी का भी बहुमान किया गया।
इसके अलावा 77वीं ओलीजी की तप आराधना करने वाली जीवनबेन पोरवाल का भी सम्मान किया गया।
सभी तपस्वियों का बहुमान श्री संघ एवं चातुर्मास समिति की ओर से किया गया। बहुमान के लाभार्थी निर्मल मेहता एवं मधुकरजी, निशान, राश्व शाह, श्रीमती नीता, पूजा एवं कु. धर्मी शाह परिवार रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। तपस्वियों की तपस्या, लाभार्थी परिवारों की धार्मिक भावना एवं सामूहिक क्षमापना के भावपूर्ण वातावरण से पूरा जिनालय परिसर मैत्री, क्षमा और आत्मशुद्धि के संदेश से गुंजायमान रहा।












