रिपोर्ट अनमोल कुमार
माँ ‘शब्दों से परे एक एहसास है जिसके बिना जीवन का कोई अर्थ नहीं “11 मई रविवार को ‘मदर्स डे’ के अवसर पर नेशनल वीर गाथा अवार्डी 15वर्षीय छात्रा प्रांजलि राज द्वारा बनाई गई ‘डर के साये में आज की माँ…पेंटिंग एक ज्वलंत विषय के साथ ही गहनता से अपनी कलात्मकता का परिचय दिया है
वहीं समाज में व्याप्त कुरीतियों को दर्शाते हुए एक माँ की मनोदशा का चित्रांकन कर समाज को संदेश दिया है l प्रांजलि ने पेंटिंग के माध्यम से आधुनिक समाज के मानवीयता के पतन से उत्पन्न दुखप्रद दशाओं और स्वाभाविक डर को खूबसूरती से माँ की ममता और भावना को इस दिवस पर समर्पित किया गया है l जो समाज के लिए भी विचारणीय है












