उज्जैन (नागदा) माणक लाल जैन
मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजयजी म.सा. एवं पवित्र रत्न विजयजी म.सा. के प्रवचन
नागदा (निप्र ) –
श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन श्रीसंघ एवं जयन्तराज चातुर्मास समिति – 2025 के तत्वावधान में पार्श्व प्रधान पाठशाला भवन में चल रही नवकार महामंत्र आराधना के शुभ अवसर पर मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री पवित्र रत्न विजयजी म.सा. ने धर्मसभा में भावविभोर कर देने वाले विचार प्रस्तुत किए।
पूज्य मुनिराज श्री प्रत्यक्ष रत्न विजयजी म.सा. ने भावयात्रा और तीर्थ यात्रा की व्याख्या करते हुए कहा कि तीर्थ यात्रा के लिए समय, स्वास्थ्य और धन की आवश्यकता होती है, जबकि भावयात्रा कल्पना, श्रद्धा और समर्पण से कहीं भी संभव है – स्वर्ग, नरक, पुण्य या पाप में। भाव यदि शुद्ध हो जाए तो स्वभाव सुधर जाता है। उन्होंने कहा कि यदि घर में प्रतिकूलता हो तो तीर्थ यात्रा की पूर्णता बाधित होती है।
उन्होंने मोटा पोशीना तीर्थ की महिमा का उल्लेख करते हुए बताया कि यह तीर्थ तारंगा के समीप स्थित है, जहाँ विध्नहर पार्श्वनाथ की अद्भुत प्रतिमा सभी बाधाओं को हरती है। राजा कुमारपाल के शासनकाल में स्थापित इस तीर्थ की ध्वजा कभी-कभी पूर्व संकेत स्वरूप मंदिर के दंड से लिपट जाती थी। उन्होंने पाटण के पंचासरा पार्श्वनाथ मंदिर और तारंगा से सिद्धाचल, धानेरा, नन्दीश्वर व नाड़ोल तीर्थों की विशेषताओं को भी उजागर किया।
प्रवचन के दौरान एक प्रसंग में नवकार मंत्र की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने एक नारी के साहस और श्रद्धा की घटना सुनाई – जहाँ एक स्त्री ने मटके में साँप के स्थान पर नवकार मंत्र के प्रभाव से माला निकाल कर अपने पति को दी, जिससे उसका पूरा परिवार उपासक बन गया।
वहीं मुनिराज श्री पवित्र रत्न विजयजी म.सा. ने कहा कि “आत्मा की जोत तभी जागती है जब नवकार की धुन लगती है।” उन्होंने कहा कि नवकार का उच्चारण मुख या कंठ से नहीं, बल्कि नाभि प्रदेश से होना श्रेष्ठतम होता है। नाभि प्रदेश आत्मा का केंद्र है, जहाँ से उत्पन्न होने वाली ध्वनि ब्रह्मांड में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
उन्होंने आठ रूचक प्रदेश, आत्मा की निर्मलता और माला जप की सही पद्धति का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब जप नाभि प्रदेश से होता है, तब वह ब्रह्मांडीय ऊर्जा का संग्रह करता है। उन्होंने एक साध्वीजी की कथा भी सुनाई, जिनकी समाधि सिद्धाचल तीर्थ पर बनी हुई है, और जिनके जीवन में नवकार मंत्र की एक हजार माला प्रतिदिन गीनी जाती थी। पूनम की रात वहाँ नवकार मंत्र की ध्वनि सुनने का दिव्य अनुभव आज भी लोगों को चमत्कृत कर देता है।
अखिल भारतीय श्री राजेन्द्र जैन नवयुवक परिषद के राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी ब्रजेश बोहरा ने बताया की
दोनों मुनिराजों के प्रवचनों से श्रद्धालुजन भावविभोर हुए। नवकार मंत्र की महिमा और तीर्थों की महत्ता पर आधारित यह धर्मसभा आत्मा को जाग्रत करने वाली सिद्ध हुई।












