झाबुआ (थांदला) माणक लाल जैन थांदला में श्वेताम्बर जैन मूर्ति पूजक श्री संघ ने भगवान महावीर का जन्म उत्सव बडे जोर-शोर से मनाया परयूषण पर्व के पांचवें दिन महावीर स्वामी की माता त्रिशला के 14 स्वप्न का कल्प सूत्र में वर्णन हे जो राजा सिद्धार्थ महावीर स्वामी के पीता श्री को उनकी मात्ता त्रिशला द्बारा स्वप्न का बताया जाता हे जीससे पंडित को स्वप्न का फल का पुछने पर महावीर स्वामी का जन्म एक आकाश में प्रकाश की तरह चमकने वाले चन्द्रमा की तरह होगा यह सुनकर चारो दिशाओं में महावीर स्वामी की जन्म उत्सव की खुसिया मनाई जाने लगी सभी 14 स्वप्न का शुभ फल होने से उन सपना जी की बोली जैन समाज के श्रावक श्रावीकाए बोली लेकर उनकी पूजा करके धर्म कार्य में सहयोगी बनते हे उसमें आखरी महावीर स्वामी के पालना की बोली जो श्रावक श्रावीकाए लेते हे वे पालना ले जा कर दूसरे दिन वापस मंदिर जी में लाते हे इसी अवसर पर समाज जनो द्बारा बढ़-चढ़कर बोली ली गई दूसरे दिन सोमवार को भगवान को रथ में विराजमान करके नगर में जय कार करते रथ नीकाला जाता हे जीसे श्रावक श्रावीकाए अपने घर के बहार गवली करके भगवान के नगर में पधारने की खुसी में अक्षत चावल नारियल से गवली की जाती हे रथ बड़े मंदिर जी से छोटे मंदिर से होकर भगवान का रथ नगर के मुख्य मार्गों सोनी गली जवाहर मार्ग गवली मौहल्ला अम्बे माता मंदिर आजाद चौक होकर छोटे मंदिर से वापसी रथ बड़े मंदिर पहुचा आज की गौतम प्रसादी का लाभ श्री सुशीला पोरवाल प्रफुल्ल पोरवाल रानी पोरवाल परिवार ने लीया












