November 8, 2026 1:47 am

भारतीय ग्रामीण पत्रकार संघ ट्रस्ट

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लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर मंडराता तथ्यहीन पत्रिकारीता का खतरा- पत्रकार यदुवंशी ननकू यादव

खोजी पत्रकारिता होती जा रही विलुप्त*सतना *नया इंडिया* आज के दौर में पत्रकारिता भी परजीवी हो गई है। अब समाप्ति के कगार पर खड़ी है ।खोजी पत्रकारिता वक्त की वहशी बयान में कलाम की सच्चाई इधर-उधर टकरा रही है ।परजीवियों का झुंड मुस्कुरा रहा है। ना अपनी कोई सोच, ना अपनी कोई खोज, साहब जो बता दिए वहीं समाचार वही अखबार इसलिए गिरावट का दौर शुरू हो गया, पत्रकारिता हो गई शर्मसार, ना कोई अचार ना विचार, ना पढ़ाई, ना लिखाई , शुरू हो गया कलाम का व्यापार, समाज में एक अलग पहचान कायम रही है। इस समाज की लेकिन नए दौर में यह समाज कलंकित हो रहा है। जो सच सैकड़ो लोगों के सामने होते देखा जा रहा है। उसको भी चाटुकारिता के में लिप्त पत्रकार अखबार वाह वही में लिखते छपते हैं ।ऐसे पत्रकार समझते हैं, पब्लिक समझ नहीं रही है। यह पब्लिक है ,सब जानती है, सबका चेहरा पहचानती है ।इसीलिए तो आज अपेक्षित है। पत्रकार दहाड़े मार रहा है। पत्रकार बढ़ रहा है, आनाचार दुर्व्यवहार विखंडित हो रही है। व्यवस्था गणित में जा रही है। सरकार आज के परिवेश में कलम के धनी सच्चे पत्रकारों को हाशिये पर कर दिया गया है।उनकी हत्याएं हो रही है क्योंकि उनकी कलम सच्ची-सच्ची खरी- खरी लिखने में गुरेज नहीं करती ॑चाहे साहब नाराज हो, चाहे अपराधी, समाज में आज ऐसे ही पत्रकारों के दम पर जिंदा है। इतिहास बनकर कलाम ,अब ना काहू, से दोस्ती ,ना काहू से बैर, का फार्मूला समाप्त हो रहा है। *अब जो साहब कहे समाचार जिनको चाय पिलायें वही पत्रकार* जिस तेजी से इस समाज का पतन हो रहा है वह निश्चित रूप से आने वाले कल के लिए शुभ संकेत नहीं है, लेकिन खोजी पत्रकारों के लिए चुनौती भरा समय आ गया है ।आज समाज में व्याप्त भ्रष्टाचारको अगर दिल खोलकर लिखता पत्रकार तो शायद व्यवस्था को दीमक के तरह चाट रहे, भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने को मजबूर होती सरकार, अब जो कुछ उजागर करता है, वह करता खोजी पत्रकार ही है इसलिए तो कहा गया है। ,जो कुछ गंधी दे नहीं, तो भी बास सुभाष,हम किसी भी तरह से पत्रकार समाज के बलिदान कर्म आचार विचार पर कोई टीका टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। बल्कि बदलते समय में जो कुछ देखा जा रहा वही लिख रहा हूं, पत्रकार शब्द अपने आप में बड़ी महत्व रखता है। इसके गरिमा को बचाए रखने की जिम्मेदारी भी अपनी ही है। वरना इसका खामियाजा तो यह समाज ही भुगत रहा है। रोज मरा जा रहा है। पत्रकार कुछ नहीं कर पा रही सरकार।

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