*जीवन में गीता का यथार्थवाद*
प्रस्तुति अनमोल कुमार
*जीवन में गीता अनिवार्य है* जो आपको अंध विश्वास से बाहर निकलती है और आपको वास्तविकता से जोड़ती है।
*वास्तविकता क्या है* ?
*. समाज में न्याय की स्थापना में व्यक्ति का सहयोग है वास्तविकता
*. शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करना है वास्तविकता
*. मन को नियंत्रित और स्वस्छ रखने के लिए बुद्धि को स्थिर करने के लिए नियमति रूप से भगवान का कीर्तन करना या भजन सुनना है वास्तविकता
*. वेद, उपनिषद, पुराण में क्या क्या ज्ञान उसे जानने के लिए हिंदी में गीता पढ़ना समझना और समझना है वास्तविकता
*. जाती– पति, भेद–भाव भुला कर भ्रातृत्व के भाव को जग कर अन्याय , अधर्म अनीति के विरुद्ध संघर्ष है वास्तविकता
*. महिलाओं का सम्मान और उनका आदर करना है वास्तविकता
*. मामन के कल्याण के लिए सेवा करना है वास्तविकता
*. स्वार्थ छोड़ कर सृष्टि की सेवा को ईश्वर की भक्ति मानना है वास्तविकता
*. अपनी संस्कृति और सभ्यता को जानना और इससे और लोगों तक पहुंचना है वास्तविकता
*. भारत की माटी से प्रेम और उसके रक्षा और सुरक्षा के लिए अपना अपना नीयत कर्म करना है वास्तविकता
वास्तविकता में जियो स्वस्थ रहो कृष्ण भक्ति में मस्त रहो ।
*स्वामी कृष्णानंद झा*
*राष्ट्रीय महा सचिव*
*भारतीय चरित्र निर्माण* *संस्थान ,दिल्ली*












