मुहर्रम के दिन मातम क्यों मनाते हैं शिया? जानिए इस दिन का इतिहास
मुहर्रम पर दुनिया भर में लोग इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धा और गम से याद कर रहे हैं। आशूरा पर करबला की घटना का महत्व भारत में ताजिए मजलिसें सुरक्षा इंतज़ाम हैं।
जून 26, नई दिल्ली:
आज मुहर्रम के अवसर पर दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय इमाम हुसैन की शहादत को श्रद्धा और गम के साथ याद कर रहा है। भारत सहित कई देशों में ताज़िए निकाले जा रहे हैं, मजलिसों का आयोजन हो रहा है और लोग इमाम हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इस मौके पर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और पुलिस जुलूस मार्गों पर निगरानी रख रही है ताकि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है और इसे शोक का महीना माना जाता है। इसकी 10वीं तारीख को आशूरा कहा जाता है, जिसका विशेष महत्व है। इसी दिन कर्बला के युद्ध में पैगंबर हज़रत मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने न्याय, सत्य और मानवता की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया था।
मुहर्रम केवल शोक का अवसर नहीं है, बल्कि यह अन्याय के खिलाफ संघर्ष, सत्य, त्याग और मानवता के मूल्यों को याद करने का संदेश भी देता है। इमाम हुसैन की कुर्बानी आज भी लोगों को न्याय, साहस और मानवता के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती है।












